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दीनदयाल उपाध्याय पुण्यतिथि: पीएम मोदी बोले- उनके सिद्धांत हर पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक; राजनाथ-शाह ने भी नमन किया

दीनदयाल उपाध्याय पुण्यतिथि: पीएम मोदी बोले- उनके सिद्धांत हर पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक; राजनाथ-शाह ने भी नमन किया

पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर बुधवार को देश के शीर्ष नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके विचारों को राष्ट्र निर्माण का स्थायी मार्गदर्शक बताया। आइए विस्तार से जानते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके विचारों को देश की हर पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक बताया।

सर्वस्व समर्पण उस चेतना की अभिव्यक्ति है, जिसमें राष्ट्र और मानवता सर्वोपरि होती है। अंत्योदय के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी ने भी इसी भावना से देश के जन-जन को सशक्त बनाने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।

पंडित दीनदयाल उपाध्याय अपने दार्शनिक सिद्धांत के लिए हैं प्रसिद्ध

पंडित दीनदयाल उपाध्याय (1916-1968) एक प्रमुख राजनीतिक चिंतक, अर्थशास्त्री और भारतीय जनसंघ के प्रमुख नेताओं में से थे। वे अपने दार्शनिक सिद्धांत ‘एकात्म मानव दर्शन’  के लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं।

उनकी विचारधारा का मूल आधार यह था कि विकास केवल भौतिक प्रगति तक सीमित न रहकर भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों पर आधारित होना चाहिए। उन्होंने व्यक्ति, समाज और प्रकृति के बीच संतुलन और सामंजस्य पर जोर दिया। उनके अनुसार, आर्थिक नीतियों का लक्ष्य केवल उत्पादन और उपभोग बढ़ाना नहीं, बल्कि मानव के समग्र विकास को सुनिश्चित करना होना चाहिए। वे 1968 में अपने असामयिक निधन तक भारतीय जनसंघ का नेतृत्व करते रहे।

समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति का विकास ही राष्ट्र का विकास

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें अंत्योदय और एकात्म मानववाद के प्रणेता व महान राष्ट्रचिंतक बताया। शाह ने कहा कि समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति का विकास ही राष्ट्र के विकास का मापदंड है और यह विचार देने वाले दीनदयाल जी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बने रहेंगे।

कर्मयोगी और महान विचारक रहे उपाध्याय

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंब ने भी उन्हें निस्वार्थ कर्मयोगी और महान विचारक बताते हुए श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि एकात्म मानव दर्शन के माध्यम से दिया गया अंत्योदय का मंत्र समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाना आज भी विकसित भारत के निर्माण की बुनियाद है। राष्ट्र सेवा और समर्पण के उनके आदर्श सदैव मार्गदर्शन करते रहेंगे।

सबका साथ, सबका विकास की भावना उनकी विचारधारा से आई

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