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जगजीवन राम जयंती: ‘अजय राय सबसे बड़ी ताकत से लड़ जाते हैं’, मीरा कुमार बोलीं- गड़बड़ी न होती तो वह एमपी होते

जगजीवन राम जयंती: ‘अजय राय सबसे बड़ी ताकत से लड़ जाते हैं’, मीरा कुमार बोलीं- गड़बड़ी न होती तो वह एमपी होते

जगजीवन राम की जयंती की पूर्व संध्या पर मीरा कुमार ने कहा कि अजय राय सबसे बड़ी ताकत से लड़ जाते हैं। गड़बड़ी न होती तो वह एमपी होते। 

राजधानी लखनऊ स्थित कांग्रेस प्रदेश मुख्यालय में पूर्व उप प्रधानमंत्री जगजीवन राम ‘बाबूजी’ की जयंती की पूर्व संध्या पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें मुख्य अतिथि के रूप में लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार शामिल हुईं। इस मौके पर दलित पूर्व सांसद और पूर्व विधायकों को सम्मानित किया। वक्ता के तौर पर प्रो. रतनलाल मौजूद रहे।

इस मौके पर मीरा कुमार ने कहा कि अजय राय सबसे बड़ी ताकत से लड़ जाते हैं। टेक्नोलॉजी में गड़बड़ी न होती तो राय एमपी होते। ये मंच एक नया उद्घोष है। यह कांग्रेस की आत्मा है, विचारधारा है। जो, गोमती के किनारे लहरें मार रही हैं। यह सैलाब कांग्रेस की ऊर्जा की हिलोरें मार रहा है।

विदेश में सामाजिक न्याय की जरूरत नहीं पड़ती

उन्होंने बाबूजी के चरणों में श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनके विचार को आगे बढ़ाने की जरूरत है। एक बार मैं उदास थी तो उन्होंने कहा था कि यह सौभाग्य है कि अछूत परिवार में जन्म लिया। ताकि, अन्याय के खिलाफ लड़ सको। मैं अलग- अलग देशों में गई हूं, लेकिन वहां सामाजिक न्याय की जरूरत नहीं पड़ती। भारत में ये जरूरत क्यों पड़ती है, इस पर सोचना होगा।मीरा कुमार ने कहा कि बीमार होने पर दो तरह के डॉक्टर सामने होते हैं। एक दवा देते हैं। दूसरा कहता है कि बीमारी के कारण को खत्म करो। छुआछूत लक्षण है। बीमारी जाति-पात है। अभी हम लक्षण में फंसे हैं। बीमारी दूर करने के बारे में सोचिए। बाबूजी से मैंने जो भी सीखा है, उसे हर व्यक्ति को बताना मेरा फर्ज है। जैसे अमर बेल फैलती है तो पेड़ सूख जाता है। जाति व्यवस्था अमरबेल है और समाज सूख गया है। इसलिए, सामाजिक न्याय की जरूरत है।

अमीरी गरीबी की खाई पटी नहीं

उन्होंने आगे कहा कि आजादी के वक्त बहुत कुछ कहा गया था, लेकिन कितना बदलाव हुआ। क्या छुआछूत खत्म हुई? आजादी मिली, लेकिन अमीरी गरीबी की खाई पटी नहीं। बाबूजी से पूछा कि आप क्यों लड़ने गए थे। आपके पूर्वजों को अपमानित किया गया था। मेरी मां को 250 रुपये देकर जेल गए। देश स्वतंत्रत न होता तो संविधान कैसे आता। अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ भाषण देने पर जेल हुई। बाबूजी को सदर अस्पताल में रखा गया।मीरा कुमार ने कहा कि अंग्रेज बांटो और राज करो, की नीति अपनाते थे। लेकिन, बांट नहीं पाए। लगातार प्रयास किया और जिन्ना सीख गए। जिन्ना मान गए और पाकिस्तान बन गया। फिर सवर्ण अछूत को बांट दिया। बोले- कांग्रेस सवर्णों की पार्टी है। कांग्रेस के पास गांधी जी थे। गांधी जी ने कहा कि हमारे पास हथियार नहीं है, तो अहिंसा की लड़ाई लड़ेंगे। फिर हम जनांदोलन के जरिये जीत गए।

यूपी में कांग्रेस से बड़ी उम्मीद है

उन्होंने कहा कि जन आंदोलन में तादात चाहिए। यह तादात दलित, पिछड़ों की थी। तब बाबूजी आगे आए और कहा कि देश की मुक्ति में ही हमारी मुक्ति है। तब देश आजाद हुआ। संविधान बना। अभी बहुत कुछ करना बाकी है। यूपी में कांग्रेस से बड़ी उम्मीद है। मेरा यहां से गहरा नाता है। मेरे नाना कानपुर में डॉक्टर थे। मेरी मां की कानपुर में पढ़ाने से मना किया तो लखनऊ आ गई। यहां पढ़ाई की।उन्होंने आगे कहा कि मेरे साथ भी अछूत का व्यवहार हुआ। चेन्नई में एक नेता ने खाने पर बुलाया। अंदर से आवाज आई तो मेरे साथ के लोग खड़े हो गए। वे यह नहीं सोच पा रहे थे कि किस प्लेट में खाना दें। हमने कहा कि हम लोग खाएंगे। प्लेट वे अपनी तोड़ेंगे, हम क्यों चिंता करें। यह अभी भी है। इससे लड़ना होगा।

स्त्री का सम्मान करना ईश्वर के दर्शन से आगे है

बाबूजी सम्पूर्ण नंद की मूर्ति का अनावरण करने गए। वहां उनके खिलाफ नारेबाजी हुई। लोकसभा में उनके अपमान को लेकर बहस हुई। बाबूजी ने जवाब नहीं दिया। 89 में बोले कि अब जवाब सोच लिया है। बोले- गंगा तट पर जमीन खरीदा है। मैं बनारस को रविदास का मंदिर भेंट करेंगे। अब उस मंदिर में उच्च विचारों की पूजा होती है। वहां सर्व धर्म संभाव का मंदिर है।मीरा कुमार ने कहा कि बाबूजी ने महिलाओं के लिए कहा कि स्त्री का सम्मान करना ईश्वर के दर्शन से आगे है। अभी पर्वतारोहण की जरूरत है। कांग्रेस को आगे बढ़ाए तभी इंकलाब होगा। बदलाव होगा। सबको साथ रहना होगा। ये पहले आप पहले आप कहने वालों की जगह है। तहजीब की जगह है।

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