छत्तीसगढ़ : गिरवरगंज में ग्रेफाइट जांच को लेकर उबाल, सैकड़ों ग्रामीण व सरपंच पंचायत मैदान में हुए एकजुट

गिरवरगंज में ग्रेफाइट जांच को लेकर उबाल, सैकड़ों ग्रामीण व सरपंच पंचायत मैदान में हुए एकजुट
शैलेंद्र कुमार द्विवेदी
इंडिया नाऊ २४
छत्तीसगढ़
बलरामपुर। बलरामपुर जिले से एक बड़ी और संवेदनशील खबर सामने आई है। जिले के गिरवरगंज गांव में सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण और जनप्रतिनिधि पंचायत मैदान में एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन पर उतर आए। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव क्षेत्र में ग्रेफाइट जांच मशीन लाई गई है, जो उनके जल, जंगल और जमीन के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
प्रदर्शन में अध्यक्ष सुनिता रक्सेल, सरपंच संस्कृति रक्सेल सहित संतोष गुप्ता, राजमोहन, नरेश, बसंतलाल, हरिलाल समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। आदिवासी ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि वे पीढ़ियों से अपनी जमीन और जंगल पर निर्भर रहकर जीवन यापन करते आ रहे हैं, और अब किसी भी प्रकार के बाहरी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं करेंगे।
ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी कि ग्रेफाइट जांच मशीन को न तो गांव में प्रवेश करने दिया जाएगा और न ही जंगल क्षेत्र में। उनका कहना है कि इस तरह की गतिविधियां आगे चलकर खनन का रास्ता खोलती हैं, जिससे आदिवासी समाज को विस्थापन का खतरा पैदा हो जाता है।
ग्रामीणों ने हसदेव परियोजना का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां विकास के नाम पर बड़े पैमाने पर जंगलों का सफाया हुआ, लोगों की जमीन छीनी गई, और आज भी आदिवासी समाज उसका खामियाजा भुगत रहा है। गिरवरगंज के ग्रामीणों का कहना है कि वे हसदेव जैसी स्थिति अपने गांव में किसी भी हाल में नहीं बनने देंगे।
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में कहा—
“हम जान दे देंगे, लेकिन अपनी जमीन नहीं देंगे।”
ग्रामीणों और सरपंचों ने निर्णय लिया है कि वे अपनी मांगों को लेकर जिला प्रशासन और कलेक्टर से मुलाकात करेंगे। उनका कहना है कि यदि प्रशासन ने उनकी बातों को गंभीरता से नहीं सुना, तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
फिलहाल गांव में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और प्रशासन की भूमिका पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन आदिवासी ग्रामीणों की मांगों पर क्या निर्णय लेता है, या फिर यह विरोध आंदोलन और व्यापक रूप लेता है।



