गोरखपुर : प्रेस क्लब में जुटे दिग्गज साहित्यकार, डॉ. ऊषा द्विवेदी की नई पुस्तक ने छेड़ी वैचारिक बहस

प्रेस क्लब में जुटे दिग्गज साहित्यकार, डॉ. ऊषा द्विवेदी की नई पुस्तक ने छेड़ी वैचारिक बहस

गोरखपुर। प्रेस क्लब, गोरखपुर में रविवार को ‘पूर्वांचल हिन्दी मंच’ के तत्वावधान में एक गरिमामयी साहित्यिक समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रख्यात विदुषी डॉ. ऊषा द्विवेदी द्वारा रचित आलोचनात्मक शोधकृति ‘छायावादोत्तर हिन्दी कविता में ईश्वर और धर्म’ का भव्य लोकार्पण विद्वान साहित्यकारों द्वारा किया गया।
ईश्वर और धर्म मानवीय चेतना के केंद्र: प्रो. अनंत मिश्र
मुख्य अतिथि प्रो. अनन्त मिश्र ने अपने उद्बोधन में पुस्तक की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय परिवेश कभी भी ईश्वर और धर्म की चिंता से विमुक्त नहीं रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा, “मनुष्यता चाहे आस्तिक हो या नास्तिक, वह धर्म और ईश्वर के वैचारिक टकराव से कभी वंचित नहीं रही।”
दार्शनिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण
मुख्य वक्ता प्रो. रामदरश राय ने आत्मा-परमात्मा के अद्वैत और अस्तित्व पर चर्चा करते हुए ‘नेति-नेति’ के दार्शनिक भाव को ईश्वर की खोज का आधार बताया। वहीं, कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. उमाकान्त राय ने लेखिका के शोध को आज के ‘विज्ञान युग’ में अत्यंत प्रासंगिक और सामयिक ठहराया।
लेखिका का वक्तव्य और सम्मान
कार्यक्रम की शुरुआत में लेखिका डॉ. ऊषा द्विवेदी ने अपनी कृति के मूल उद्देश्यों पर ‘आत्मवक्तव्य’ प्रस्तुत किया। इस अवसर पर ग्रन्थ के अक्षरसंयोजक श्री महेश नारायण त्रिगुणायत, प्रकाशक श्री सौरभ सिंह एवं लेखिका की सासुमाता श्रीमती पुष्पा देवी को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
उपस्थिति एवं धन्यवाद
इस अवसर पर डॉ. आर.के. राय, डॉ. शाकिर अली खां, डॉ. विनयमोहन त्रिपाठी, डॉ. फूलचन्द प्रसाद गुप्त ‘अन्ज’, संपादक श्री आदित्य चन्द्र, डॉ. अजय अनजान, डॉ. अमिताभ पाण्डेय और डॉ. अंगद कुमार सिंह ने अपनी शुभकामनाएँ दीं।
कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. अमिताभ पाण्डेय ने किया। स्वागत भाषण डॉ. संजयन त्रिपाठी व डॉ. अजय अनजान द्वारा दिया गया, जबकि डॉ. अंगद कुमार सिंह ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। राष्ट्रगान के साथ इस बौद्धिक विमर्श का समापन हुआ।



