गोरखपुर : पूर्वोत्तर रेलवे में कवच सिस्टम लगाने का कार्य तेज, 1441 रूट किमी पर लगेगा अत्याधुनिक सुरक्षा तंत्र

पूर्वोत्तर रेलवे में कवच सिस्टम लगाने का कार्य तेज, 1441 रूट किमी पर लगेगा अत्याधुनिक सुरक्षा तंत्र
गोरखपुर/ भारतीय रेल पर ट्रेनों के सुरक्षित और संरक्षित संचालन के लिए कवच सिस्टम लगाने का कार्य प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है। इसी क्रम में पूर्वोत्तर रेलवे में भी रेल सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए कवच सिस्टम लगाने का काम तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।
कवच सिस्टम एक अत्याधुनिक स्वदेशी तकनीक है, जिसमें ऑप्टिकल फाइबर केबल, टेलीकॉम टावर, स्टेशन डेस्क राउटर, इंटरलॉकिंग तथा लोकोमोटिव में लगने वाले उपकरण शामिल होते हैं। इस तकनीक के माध्यम से ट्रेन की गति, सिग्नल की स्थिति और ट्रैक पर मौजूद अन्य ट्रेनों की जानकारी रियल टाइम में प्राप्त होती है, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना काफी कम हो जाती है।
इस सिस्टम के मुख्य घटकों में ऑन-बोर्ड उपकरण, ब्रेक इंटरफेस यूनिट, लोको पायलट मशीन इंटरफेस, आरएफआईडी रीडर, स्टेशन मास्टर ऑपरेशन पैनल, कंट्रोल पैनल तथा आरएफआईडी टैग शामिल हैं। आरएफआईडी टैग प्रत्येक किलोमीटर पर लगाए जाते हैं, जिससे ट्रेनों की लोकेशन का सटीक पता चलता है।
पूर्वोत्तर रेलवे में इस अत्याधुनिक ट्रेन सुरक्षा प्रणाली को 1441 रूट किलोमीटर पर स्थापित करने का कार्य रेल मंत्रालय द्वारा 492.21 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृत किया गया है। इसके तहत लखनऊ, वाराणसी और इज्जतनगर मंडल के कई महत्वपूर्ण रेलखंडों पर कवच सिस्टम लगाने का कार्य शुरू कर दिया गया है।
प्रथम चरण में पूर्वोत्तर रेलवे के 551 रूट किलोमीटर प्रमुख रेलमार्गों पर कवच सिस्टम लगाया जाएगा। इसमें सीतापुर सिटी–बुढ़वल, बुढ़वल–मनकापुर, गोंडा–बाराबंकी, गोरखपुर–गोण्डा–गोरखपुर कैंट–नौतनवा तथा वाराणसी–औंड़िहार–जौनपुर जैसे महत्वपूर्ण खंड शामिल हैं।
इसके अलावा गोरखपुर–बस्ती रेलखंड पर भी कवच सिस्टम के लिए 20 टावर स्थापित किए जा चुके हैं। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस तकनीक के लागू होने से ट्रेन संचालन और अधिक सुरक्षित, आधुनिक और विश्वसनीय बन सकेगा।


