गोरखपुर : दीक्षा भवन एवं संवाद भवन तैयारियों के अंतिम चरण में, अगले माह से शुरू होंगे कार्यक्रम

गोरखपुर ।दीक्षा भवन एवं संवाद भवन तैयारियों के अंतिम चरण में, अगले माह से शुरू होंगे कार्यक्रम
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय परिसर में नवनिर्मित दीक्षा भवन एवं संवाद भवन ऑडिटोरियम अपने अंतिम निर्माण चरण में हैं। दोनों भवनों में शेष कार्य तीव्र गति से पूर्ण किया जा रहा है तथा संभावना है कि आगामी माह से इनमें शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं बौद्धिक कार्यक्रमों का आयोजन प्रारंभ हो जाएगा।
इन अत्याधुनिक ऑडिटोरियम के निर्माण से विश्वविद्यालय परिसर में अकादमिक गतिविधियों को नई ऊर्जा मिलेगी और राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों के आयोजन हेतु विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
दीक्षा भवन की प्रमुख विशेषताएं:
दीक्षा भवन एक अत्याधुनिक, पूर्णतः वातानुकूलित सभागार है, जिसमें 576 व्यक्तियों के बैठने की सुव्यवस्थित क्षमता है। लगभग 7000 वर्गफुट क्षेत्रफल में निर्मित इस सभागार में उच्च गुणवत्ता का फ्लोर कार्पेट तथा आधुनिक ऑडियो-विजुअल सिस्टम स्थापित किया गया है।
पूरे भवन में 68 टन क्षमता का VRV (Variable Refrigerant Volume) एयर कंडीशनिंग सिस्टम लगाया गया है, जो समुचित तापमान एवं आरामदायक वातावरण सुनिश्चित करता है।
इसके अतिरिक्त, भवन में पुरुष एवं महिला हेतु पृथक ग्रीन रूम (एयर कंडीशनर सहित), एक सुसज्जित वीआईपी प्रतीक्षालय (स्प्लिट एसी सहित) तथा 100 से अधिक व्यक्तियों की क्षमता वाला “एंट्रेंस हॉल” (5 स्प्लिट एसी सहित) भी निर्मित किया गया है।
भवन के बाहरी परिसर का भी समुचित विकास किया गया है, जहां सड़क के किनारे 80 स्ट्रीट लाइट पोल एवं 100 पत्थर की बेंचें स्थापित की गई हैं, जिससे आगंतुकों को बेहतर सुविधा एवं अनुभव प्राप्त होगा।
पीएम ऊषा योजना के अंतर्गत निर्मित दीक्षा भवन पर लगभग ₹953.46 लाख तथा संवाद भवन पर लगभग ₹406.00 लाख की लागत व्यय की गई है।
कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा,
“दीक्षा भवन एवं संवाद भवन का निर्माण विश्वविद्यालय के अधोसंरचनात्मक विकास की दिशा में एक मील का पत्थर है। इन अत्याधुनिक सुविधाओं के माध्यम से न केवल शिक्षण एवं शोध गतिविधियों को नई गति मिलेगी, बल्कि विश्वविद्यालय राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयोजनों का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा।”
इन भवनों के क्रियाशील होने से विश्वविद्यालय में शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं बौद्धिक गतिविधियों को नया आयाम मिलेगा और संस्थान की राष्ट्रीय प्रतिष्ठा और अधिक सुदृढ़ होगी।



