गोरखपुर/कैंपियरगंज : योगी के ‘गढ़’ में खाकी दागदार: कैंपियरगंज SO सस्पेंड, क्या CM सिटी की नाक के नीचे चल रहा था वसूली का खेल?

योगी के ‘गढ़’ में खाकी दागदार: कैंपियरगंज SO सस्पेंड, क्या CM सिटी की नाक के नीचे चल रहा था वसूली का खेल?
सिस्टम में भ्रष्टाचार का कीड़ा सीएम आवास से महज 35 किमी दूर SO ने बना डाला थाने को ‘उगाही का अड्डा
गोरखपुर/कैंपियरगंज: उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार मुक्त शासन का दावा करने वाली योगी सरकार के अपने ही ‘गढ़’ में खाकी को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। गोरखपुर के कैंपियरगंज थाने के SO जितेंद्र प्रताप सिंह पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के बाद गाज गिरी है। जांच रिपोर्ट में पुष्टि होने के बाद उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
सीएम सिटी में ‘अंधेर नगरी’
यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि कैंपियरगंज थाना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गोरखपुर आवास से मात्र 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। सवाल यह उठ रहा है कि अगर मुख्यमंत्री के इतने करीब भ्रष्टाचार का यह खेल बेखौफ चल रहा था, तो प्रदेश के दूर-दराज के जिलों में क्या स्थिति होगी?
सिर्फ एक थाना या पूरे तंत्र का हाल?
स्थानीय लोगों और जानकारों का मानना है कि यह केवल एक थाने की कहानी नहीं है। यदि ईमानदारी से जांच की जाए, तो कई थानों की ‘कलई’ खुल सकती है। आरोप है कि थानों में न्याय के बजाय ‘धन उगाही’ को प्राथमिकता दी जा रही है। भ्रष्टाचार का कीड़ा सिस्टम की जड़ों में इस कदर घुस चुका है कि सत्ता की सख्ती का खौफ भी बेअसर साबित हो रहा है।
मुख्य बिंदु: दूरी की विडंबना: सीएम सिटी से महज 35 किमी दूर थाने में चल रहा था अवैध वसूली का धंधा।
जांच का दायरा: क्या यह कार्रवाई केवल एक SO तक सीमित रहेगी या वसूली के इस नेटवर्क की गहराई तक जांच होगी?
जनता का सवाल: मुख्यमंत्री की सख्ती के बावजूद पुलिसिया तंत्र में बैठे कुछ लोग उनकी छवि को धूमिल करने पर क्यों तुले हैं?
निष्कर्ष: कैंपियरगंज की इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई अभी बहुत लंबी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा पर कोई संदेह नहीं है, लेकिन उनके आदेशों को धरातल पर उतारने वाले ‘सिस्टम’ की सफाई करना अब अनिवार्य हो गया है।



