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गोरखनाथ नगरी पहुंचे ‘सोमनाथ ज्योतिर्लिंग’ के पावन अंश, उमड़ी भक्तों की अपार श्रद्धा

गोरखनाथ नगरी पहुंचे ‘सोमनाथ ज्योतिर्लिंग’ के पावन अंश, उमड़ी भक्तों की अपार श्रद्धा

गोरखपुर। आर्ट ऑफ लिविंग परिवार गोरखपुर द्वारा आयोजित सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के पवित्र अंश की दिव्य यात्रा बुधवार को गोरखनाथ की नगरी पहुंची। दिल्ली, कानपुर, प्रयागराज और आजमगढ़ की पावन भूमियों को स्पर्श करती हुई यह पावन यात्रा गीता वाटिका गोरखपुर में विराजमान हुई, जहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। बेंगलुरु से पधारे पूज्य स्वामी श्री प्रकाशानंद जी महाराज के सान्निध्य में भक्तों ने अत्यंत भाव-विभोर होकर दर्शन-पूजन किया।

शाम 5 बजे पवित्र ज्योतिर्लिंग अंश के आगमन के साथ ही गीता वाटिका परिसर दिव्य ज्योति और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। विधिवत स्थापना के उपरांत वैदिक मंत्रोच्चार, घंटा-घड़ियाल की मधुर ध्वनि और सुगंधित धूप-दीप के मध्य पूज्य स्वामीजी ने शिष्यों सहित रुद्रपूजा, गुरु पूजा तथा पंचामृत अभिषेक का भव्य आयोजन किया।

तदुपरांत शिव पंचाक्षर स्तोत्र का सामूहिक पाठ हुआ, जिसमें सत्संग के मधुर और भावपूर्ण संगीत से पूरा वातावरण आध्यात्मिक हो गया। उनकी दिव्य स्वर लहरियों ने भक्तों के हृदय को स्पर्श किया और समूचा परिसर “ॐ नमः शिवाय” की पावन ध्वनि से शिवमय हो उठा।

पूजन के पश्चात भव्य महाआरती का आयोजन किया गया। आरती की दिव्य ज्योति को माथे से स्पर्श करने के लिए श्रद्धालुओं में अपार उत्साह देखा गया। “हर हर महादेव! ॐ नमः शिवाय! जय भोलेनाथ!” के गगनभेदी जयघोष से पूरा परिसर गुंजायमान हो गया। भक्तजन अनुशासित कतारों में खड़े होकर घंटों तक दर्शन करते रहे और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त किया। दर्शन-पूजन का यह सिलसिला देर शाम तक निरंतर चलता रहा।

इस पावन अवसर पर स्टेट टीचर कोऑर्डिनेशन श्री संजय पांडेय, आर्ट ऑफ लिविंग के वरिष्ठ टीचर रुचि दहिया ,आलोक गुप्ता, सिखा विज, सीमा छापड़िया, ज्ञानति यादव,मनोज सिंह, राजकुमार यादव सहित अनेक गणमान्य भक्तजन उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के समापन पर पवित्र ज्योतिर्लिंग अंश को आगे की यात्रा के लिए श्रद्धापूर्वक विदा किया गया, जहां अन्य स्थानों पर भी शिव-भक्तों को इसके दिव्य दर्शन का सौभाग्य प्राप्त होगा।

इतिहास और आध्यात्मिक विरासत का अद्भुत संगम

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का यह पावन अंश अपने साथ एक हजार वर्षों की दिव्य परंपरा को संजोए हुए है। इतिहास में उल्लेख मिलता है कि महमूद ग़ज़नी द्वारा लगभग 1000 वर्ष पूर्व सोमनाथ मंदिर को खंडित किया गया था। उस समय वहां के अग्निहोत्री पुरोहितों ने ज्योतिर्लिंग के पवित्र अंशों को सुरक्षित रखा और पीढ़ी दर पीढ़ी उसकी पूजा-अर्चना करते रहे।

आगे चलकर कांची के परमाचार्य ने निर्देश दिया कि उचित समय आने पर इस दिव्य अंश को एक महान संत को सौंपा जाए। उनकी आज्ञा के अनुसार, इस वर्ष जनवरी माह में यह पावन अंश श्री श्री रविशंकर जी को समर्पित किया गया। गुरुदेव की प्रेरणा से यह सोमनाथ ज्योतिर्लिंग यात्रा आज पूरे भारतवर्ष में श्रद्धा और भक्ति का संदेश फैलाते हुए संचालित हो रही है।

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