आनंद महिंद्रा इस भारतीय शहर से हैं बहुत प्रभावित, जो पूरी तरह से हो गया है ट्रैफिक सिग्नल फ्री

आनंद महिंद्रा इस भारतीय शहर से हैं बहुत प्रभावित, जो पूरी तरह से हो गया है ट्रैफिक सिग्नल फ्री
शहरी यातायात प्रबंधन में इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने उद्योगपति आनंद महिंद्रा को भी प्रभावित किया। उन्होंने इसे लेकर सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया जताई है।
राजस्थान का कोटा भारत का पहला ऐसा शहर बन गया है जहां एक भी ट्रैफिक सिग्नल नहीं है। शहरी यातायात प्रबंधन में इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने उद्योगपति आनंद महिंद्रा को भी प्रभावित किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए पूछा, “क्या यह पूरे शहर में लागू हो चुका है? वाकई बेहद प्रभावशाली।”कोचिंग हब के रूप में प्रसिद्ध कोटा में रोज लाखों लोगों और हजारों छात्रों की आवाजाही होती है, लेकिन अब बिना किसी ट्रैफिक लाइट के भी वाहन सुचारू रूप से चलते नजर आते हैं।यह भी पढ़ें – GRAP: दिल्ली-एनसीआर में ग्रैप-3 हटाया गया, इन गाड़ियों के चलाने पर से पाबंदी हटी, जानें डिटेल्स
कैसे हटाए गए कोटा के सभी ट्रैफिक सिग्नलइस परिवर्तन के पीछे कोटा के अर्बन इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट (UIT) की दीर्घकालिक योजनाएं और डिजाइन-आधारित दृष्टिकोण रहा। शहर में आपस में जुड़े रिंग रोड नेटवर्क विकसित किए गए, जो भीड़भाड़ वाले आंतरिक इलाकों से यातायात को दूर ले जाते हैं।इससे शहर के केंद्र में दबाव कम हुआ और लोग तेजी से आने-जाने के लिए बाहरी मार्गों का उपयोग करने लगे।
फ्लाईओवर और अंडरपास का बड़ा योगदान
मुख्य चौराहों पर दो दर्जन से अधिक फ्लाईओवर और अंडरपास बनाए गए, जिससे वाहन बिना रुके आगे बढ़ पाते हैं। इन संरचनाओं ने न केवल ट्रैफिक जाम कम किया बल्कि अचानक ब्रेक लगाने वाले हादसों और ईंधन की बर्बादी को भी काफी घटाया।
डिजाइन पर आधारित ‘कंफ्लिक्ट-फ्री’ सड़क नेटवर्ककोटा का मॉडल सिग्नल हटाने के बजाय ऐसा सड़क ढांचा तैयार करने पर केंद्रित है, जिसमें ट्रैफिक अपने आप सही दिशा में बहता रहे। फ्लाईओवर और अंडरपास ट्रैफिक लेवल को अलग करते हैं, जबकि राउंडअबाउट और वन-वे कॉरिडोर शहर में निरंतर गति बनाए रखते हैं। सड़क संकेतों और लेन मार्किंग को भी साफ और सुसंगत बनाया गया है, और भीड़भाड़ वाले समय में पुलिसकर्मी और स्वयंसेवक पैदल यात्रियों की सहायता करते हैं।
आज कैसा दिखता है कोटा का ट्रैफिकशहर में अब वह रुक-रुक कर चलने वाला ट्रैफिक नहीं दिखता जो बड़े महानगरों में आम है। रोजाना भारी भीड़ और छात्रों की आवाजाही के बावजूद यातायात सुचारू, अनुमानित और काफी हद तक शांत बना रहता है।यह भी पढ़ें – EV: केरल में इलेक्ट्रिक वाहनों की लोकप्रियता में तेजी! रोड टैक्स बढ़ने के बावजूद ईवी की लहर हुई और मजबूत यह भी पढ़ें – Auto Sales: अक्तूबर में टू-व्हीलर बिक्री ने बनाया रिकॉर्ड, त्योहारों, ग्रामीण मांग और जीएसटी 2.0 से बाजार में जोरदार उछाल
अन्य भारतीय शहरों के लिए नया मानककोटा का यह प्रयोग दिखाता है कि किस तरह समझदारी से की गई इंफ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग पारंपरिक रेड लाइट सिस्टम की जगह ले सकती है। यह मॉडल न केवल ट्रैफिक को तेज बनाता है, बल्कि सड़क सुरक्षा बढ़ाता है, प्रदूषण कम करता है और ईंधन की बचत भी करता है।
आज कोटा भारत के लिए एक उदाहरण है। एक ऐसा शहर जहां ट्रैफिक बिना रुके चलता है, और जहां स्मार्ट इंजीनियरिंग ने सिग्नलों को अनावश्यक बना दिया है।



