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आनंद मठ देखकर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक बोले- मन कर रहा था कि मंच पर जाकर अंग्रेज दरोगा को थप्पड़ मार दूं

आनंद मठ देखकर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक बोले- मन कर रहा था कि मंच पर जाकर अंग्रेज दरोगा को थप्पड़ मार दूं

उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक शुक्रवार को भारतेंदु नाट्य अकादमी के स्वर्ण जयंती समारोह में पहुंचे और नाटक आनंदमठ का मंचन देखा। कार्यक्रम में राज्यपाल ने 20 कलाकारों को भी सम्मानित किया।

भारतेंदु नाट्य अकादमी के स्वर्ण जयंती समारोह के छठे दिन कार्यक्रम में पहुंचे उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने नाटक आनंद मठ का मंचन देखा और अपने संबोधन में कहा कि भारत बड़ी सांस्कृतिक विरासत वाला देश है। समाज की विकृतियों को जब कलाकार मंच पर उतारते हैं तो समाज को नई दिशा मिलती है।
उन्होंने कहा कि मैं थोड़ी देर पहले जब आनंद मठ नाटक का मंचन देख रहा था तो हिंदुस्तानियों पर उसके जुल्म देखकर मन कर रहा था कि मंच पर पहुंच कर उस अंग्रेज दरोगा को थप्पड़ मार दूं। यह सुनकर पूरा हाल तालियों और हंसी से गूंज गया। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि बंगाल ने हमारे देश को रवींद्र नाथ टैगोर, स्वामी विवेकानंद और सुभाष चंद्र बोस जैसे महापुरुष दिए हैं लेकिन अब अगर बंगाल की हालत देखिए तो दुख होता है। देश की सबसे बड़ी सांस्कृतिक विरासत का राज्य आज बदहाली का शिकार हो गया है। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा से ही विश्व का पथ-प्रदर्शक रहा है।

आनंद मठ के माध्यम से देश की संस्कृति को पूरी दुनिया में फैलाने का काम हुआ है। कार्यक्रम में राज्यपाल आनंदी बेन पटेल आज 20 कलाकारों को सम्मानित किया। इस अवसर पर लोकमाता अहिल्याबाई पर आधारित बाल नाटक पुस्तिका का विमोचन भी राज्यपाल ने किया।

राज्यपाल बोलीं- रंगमंच केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं बल्कि आत्मा का स्वर भीबीएनए के स्वर्ण जयंती समारोह के अवसर पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि रंगमंच केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं बल्कि आत्मा का स्वर भी है। उन्होंने कहा कि रंगमंच की सबसे बड़ी शक्ति उसकी संवेदनशीलता है। तकनीक हमें जोड़ सकती है लेकिन संवेदनशीलता तो कला के संवर्धन से ही आएगी।

उन्होंने कहा कि भारतेंदु नाट्य अकादमी ने नाट्य कला के क्षेत्र में काफी काम किया है। 50 वर्षों की यात्रा को आठ दिवसीय स्वर्ण जयंती नाट्य समारोह के माध्यम से बीएनए ने बेहतर तरीके से प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि नाट्य विधा को केवल शहरों तक सीमित न रखें बल्कि इसे गांव गांव तक पहुंचाएं। भारतीय रंगमंच की परंपरा को और समृद्ध बनाएं और इसे आम आदमी से जोड़ें।

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