Breaking News देश राज्य होम

साइबर सुरक्षा कानून राष्ट्रीय कानून का एक जरूरी हिस्सा होना चाहिए

साइबर सुरक्षा कानून राष्ट्रीय कानून का एक जरूरी हिस्सा होना चाहिए
रिपोर्टर योगेश गुरूग्राम India Now24
नई दिल्ली !  कोविड-19 के दौरान साइबर हमलों से सुरक्षा के लिए जरूरी सावधानियों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए, पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने “एमर्जिंग साइबर थ्रेट्स एंड चैलेंजेज इन इंडिया ड्यूरिंग कोविड-19 लाॅकडाउन“ (लाॅकडाउन के दौरान भारत में उभरते साइबर खतरें और चुनौतियों) पर एक विशेष इंटरैक्टिव सेशन का आयोजन किया। इस दौरान कारोबारी जगत से लेकर साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट और पुलिस अधिकारी भी उपस्थित थे, जिनमें श्री सचिन देधियासंस्थापक और सीईओ, स्काईनेट सिक्योर सॉल्यूशंसश्री मैथ्यू सी, मैनेजर, सेल्स इंजीनियरिंग-एपीएसी, वाॅचगार्ड टेक्नोलाॅजीज इंक., डॉ.पवन दुग्गलसंस्थापक एवं चेयरमैन, इंटरनेशनल कमीशन आॅन साइबर सिक्योरिटी लाॅ और श्री अनीश रॉयडीसीपी, साइबर अपराध, दिल्ली पुलिस प्रमुख तौर पर शामिल हैं।
डॉ.पवन दुग्गलसंस्थापक एवं चेयरमैन, इंटरनेशनल कमीशन आॅन साइबर सिक्योरिटी लाॅ  ने अपने प्रेजेटेंशन में लाॅकडाउन के दौरान भारत में उभरते साइबर खतरें और चुनौतियों पर विस्तार से बताया कि आज के दौर में साइबर हमले एक न्यू नाॅर्मेल हो गए हैं। उन्होंने भारत में और वैश्विक स्तर पर कॉर्पाेरेट कंपनियों, अस्पतालों, और बैंकों के मामले का अध्ययन किया है, जो साइबर हमले के कारण हुए नुकसान का सामना कर रहे हैं। उन्होंने साइबर हमलों की गंभीरता को भी साझा किया और इस बात पर जोर दिया कि साइबर सुरक्षा हमारे जीवन का एक जरूरी हिस्सा होना चाहिए और हमारे नेटवर्क और उपकरणों को सुरक्षित रखना काफी अधिक महत्वपूर्ण है।
डॉ.पवन दुग्गल ने भारत में डेटा सुरक्षा और गोपनीयता कानूनों के बारे में जानकारी साझा की और कहा कि इनको लेकर अभी भी काफी काम करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जबकि कंपनियां अपने कर्मचारियों को घर से काम करने की सुविधा दे रही हैं, ऐसे में उन्हें अपनी सुरक्षा पाॅलिसीज को मजबूत करने की आवश्यकता है ताकि वे साइबर हमलों का शिकार ना बनें। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि साइबर सुरक्षा कानून राष्ट्रीय कानून का एक हिस्सा होना चाहिए। उन्होंने हाल ही में बने वैश्विक साइबर सुरक्षा नियमों और कानूनों के बारे में भी बताया, जो कि पूरी दुनिया में सामने आ रहे हैं और इनसे इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को मदद मिल रही है।
श्री अनीश रॉयडीसीपी, साइबर अपराध, दिल्ली पुलिस  ने बताया कि बिजनेस ई-मेल के माध्यम से सबसे अधिक धोखाधड़ी हो रही है, जिसको आॅटोमैटिक रिप्लाई की बंद कर खुद मेल लिखकर बचा जा सकता है। इससे कई तरह की धोखाधड़ी से बचने में मदद मिलती है। उन्होंने ईमेल, मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में एंटी-वायरस इंस्टाल करने की आवश्यकता भी जताई। उन्होंने साइबर हमलों में फिरौती मांगने के बढ़ते मामलों के बारे में भी बताया जो कि एक तरह का जालसाज सॉफ्टवेयर है जिसे कंप्यूटर सिस्टम का एक्सेस रोकने के लिए डिजाइन किया गया है। फिरौती की रकम मिलने के बाद ही सिस्टम का एक्सेस दोबारा मिलता है। उन्होंने सुझाव दिया कि सुरक्षा के कई स्तरों जैसे बैकअप क्लाउड, लॉकिंग सिस्टम को भी अपनाया जा सकता है।
श्री अनीश रॉय ने साइबर खतरे से डेटा, सिस्टम, आदि की रक्षा के लिए बचाव उपायों या सावधानियों पर ध्यान दिया, जिसमें फ्री वेब-आधारित ईमेल अकाउंट से बचना, एक कंपनी डोमेन नाम स्थापित करना और एक कंपनी ईमेल खाता स्थापित करने से बचना शामिल है। फ्री की सुविधा देकर पूरा कंट्रोज जालसाज अपने हाथ में ले लेते हैं। किसी भी उपकरण पर किसी भी संदिग्ध गतिविधि के बारे में अतिरिक्त आईटी और वित्तीय सुरक्षा सिस्टम और अन्य सुरक्षा उपायों पर विचार करना चाहिए।
 
श्री संजय अग्रवाल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने अपने स्वागत भाषण में साइबर अपराध और हैकिंग के मामलों में वृद्धि के बारे में चिंता व्यक्त की, जिससे व्यापार और अन्य समूह कंपनियों में नुकसान हुआ है। कोविड-19 के कारण, डिजिटली तौर पर काम करने के प्रोसेस में वृद्धि हुई है, लेकिन अधिकांश व्यवसाय और कंपनियां अपने कार्य नेटवर्क को सुरक्षित करने के लिए सही जागरूकता या संसाधनों के अधिकार से सुसज्जित नहीं हैं।
श्री मैथ्यू सी ने अपने प्रेजेंटेशन में कोविड19 के दौरान साइबर खतरों पर बात करते हुए कहा कि लाॅकडाउन के दौरान पूरी दुनिया में हैकिंग के मामलों में काफी अधिक उछाल दर्ज किया गया है।
उन्होंने साइबर हमलों से प्रभावित कारोबारी गु्रपों के वैश्विक मामलों की भी स्टडी के बारे में बताया। उन्होंने व्यापार और कॉर्पोरेट कंपनियों के नेटवर्क की सुरक्षा में वॉचगार्ड टेक्नोलॉजीज इंक के कामकाज के बारे में भी उपयोगी जानकारी दी।
श्री सचिन डेढ़िया ने अपने संबोधन में किसी भी व्यक्ति के पासवर्ड को उनके सिस्टम से दोबारा प्राप्त करने और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर हैकिंग करने के व्यावहारिक उदाहरणों के साथ एक विस्तृत प्रेजेंटेशन दी। उन्होंने यह भी बताया कि कैसे कोई उपयोगी साइटों और एप्लिकेशन के माध्यम से नेटवर्क पर यूजर्स की संख्या की निगरानी कर सकता है।
सुश्री नज्म बिलोचपुरा ने सेशन को मॉडरेट करते हुए लॉकडाउन के दौरान पिछले कुछ महीनों में साइबर हैकिंग के मामलों में वृद्धि की संक्षिप्त जानकारी दी। उसने साइबर सुरक्षा के सबसे महत्वपूर्ण पहलू यानी संभावित खतरों से निपटने और अपने सिस्टम और नेटवर्क को सुरक्षित रखने के तरीके के बारे में भी बताया। उन्होंने नेटवर्क की रक्षा के लिए टिप्स भी दिए, जिनमें केवाईसी चेक, आईटी सिक्योरिटी पाॅलिसी, डिजिटल यूज के लिए एसओपी, सिक्योरिटी एसेसमेंट और व्हिसल बलोअर पाॅलिसी अपनाने आदि कई उपाय शामिल हैं।
डाॅ. अरुणा अभय ओसवाल, चेयरपर्सन, वीमेन एंटरप्रेन्योरशिप कमेटी, पीएचडी चैंबर ने अपने संबोधन में गेटवे को सुरक्षित करने और चल रहे साइबर हमलों से खुद को बचाने की आवश्यकता पर ध्यान देने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि साइबर क्राइम इन दिनों मुख्य चिंता का विषय है क्योंकि कोविड 19 के इन चुनौतीपूर्ण समय में साइबर खतरों से अधिकांश व्यवसायों और संगठनों पर हमला किया जाता है जहां कई लोग घर से काम करते हैं।
डॉ. ब्लॉसम कोचर, सह-अध्यक्ष, वीमेन एंटरप्रेन्योरशिप कमेटी, पीएचडी चैंबर ने सभी प्रतिनिधियों और प्रतिभागियों को धन्यवाद का औपचारिक वोट दिया।
श्री सौरभ सान्याल, जनरल सैक्रेटरी, पीएचडी चैंबर ने सम्मानित प्रतिनिधियों के विचार-विमर्श की सराहना करते हुए बताया कि कैसे कॉर्पोरेट क्षेत्र में साइबर अपराध एक मुद्दा बना हुआ है। उन्होंने साइबर सुरक्षा और हैकिंग के खतरों और कमियों के बारे में भी सवाल पूछे।
सेशन को राउंड्रोबिन टेक सर्विसेज, डॉ. अरुणा ओसवाल, और कोका कोला द्वारा स्पांसर किया गया था और इसमें पूरे भारत से 100 से अधिक उद्योग दिग्गजों की व्यापक मौजूदगी रही। सेशन का संचालन सुश्री नज्म बिलोचपुरा, मेंबर, वीमेन एंटरप्रेन्योरशिप कमेटी के साथ ही डॉ. योगेश श्रीवास्तव, प्रिंसिपल डायरेक्टर, पीएचडी चैंबर ने किया।