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विशेषज्ञों का कहना है कि रोग कारक फफूंदी व जीवाणु बीज से लिपटे रहते हैं या भूमि में पड़े रहते हैं

बहराइच ब्रेकिंग न्यूज

विशेषज्ञों का कहना है कि रोग कारक फफूंदी व जीवाणु बीज से लिपटे रहते हैं या भूमि में पड़े रहते हैं

बीज व भूमि जनित रोगों से फसलों को बचाने के लिए उपचारित बीज की बुवाई काफी फायदेमंद होगी। फसल उत्पादन बढ़ने के साथ ही पौध में रोग लगने की संभावना नहीं रहेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि रोग कारक फफूंदी व जीवाणु बीज से लिपटे रहते हैं या भूमि में पड़े रहते हैं।

कृषि रक्षा अधिकारी रामदरश वर्मा ने बताया कि बीज बोने के बाद फफूंदी अपने स्वभाव के अनुसार नमी प्राप्त होते ही उगते बीज, अंकुर या पौधों के विभिन्न भागों को संक्रमित करके रोग उत्पन्न करते हैं। रोगों से फसलों को बचाने के लिए बीज उपचार ही एकमात्र सरल सस्ता व सुरक्षात्मक उपाय है। बीज शोधन के लिए फफूंदीनाशक रसायनों थीरम 75 प्रति, कार्बाक्सिन 37.5 प्रति को 2-3 ग्राम रसायन प्रति किग्रा बीज की दर से व बायोपेस्टीसाइड ट्राईकोडर्मा हारजेनियम चार ग्रा प्रति किग्रा से उपचारित कर बुवाई करना चाहिए। उन्होंने बताया कि गेहूं की फसल में स्मट, मटर, मंसूर, मिर्च, चना, अरहर में उकठा रोग व सरसो/राई में मिल्ड्यू पाउडरी रोग से बचाव को बोने से पूर्व बीज को तीन ग्राम थीरम या दो ग्राम कार्बांडाजिम प्रति किग्रा बीज की दर से बीज शोधन करना चाहिए।

रिपोर्टर – इंडिया नाउ 24 राहुल कुमार गौतम बहराइच