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लखीमपुर खीरी – जानिए 21 मई को मनाये जाने वाले “आतंकवाद विरोधी दिवस” के बारे में विस्तार से

लखीमपुर -खीरी

जानिए 21 मई को मनाये जाने वाले “आतंकवाद विरोधी दिवस” के बारे में विस्तार से

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——-(अनुपम मिश्रा)

21 मई 2020 ,गुरुवार

हर साल देश में 21 मई को मनाया जाता है “आतंकवाद विरोधी दिवस”

क्या है आतंकवाद विरोधी दिवस का इतिहास?

इस बार कोरोना महामारी के दौरान मनाया गया “आतंकवाद विरोधी दिवस”।

देश में 21 मई 2020, यानी गुरुवार को आतंकवाद विरोधी दिवस मनाया गया। इस बार यह दिवस कोरोना वायरस से फैली महामारी के दौर में मनाया गया। जनपद लखीमपुर में अधिकारी व कर्मचारियों द्वारा चेहरों पर मास्क लगाकर व सोशल डिस्टेंसिंग का पूरी तरह से पालन करतेे हुए जनपद लखीमपुर में कलेक्ट्रेट परिसर में जिलाधिकारी द्वारा, पुलिस लाईन में पुलिस अधीक्षक द्वारा तथा सभी थानों में संबंधित थाना प्रभारियों द्वारा “आतंकवाद विरोधी दिवस”मनाया गया।

हर साल 21 मई को मनाए जाने वाले “आतंकवाद विरोधी दिवस” पर स्कूल ,कॉलेज ,सरकारी कार्यालयों सहित समाज के युवाओं को आतंकवाद विरोधी शपथ दिलाई जाती है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर सावधानी के साथ आतंकवाद विरोधी दिवस मनाने के निर्देश दिए हैं।

*”आतंकवाद विरोधी दिवस” मनाने के उद्देश्य*

हर साल मनाए जाने वाले आतंकवाद विरोधी दिवस को मनाने का उद्देश्य युवाओं को आतंकवाद और हिंसा के पथ से दूर रखना, शांति और मानवता का संदेश फैलाना, लोगों को जागरूक करना, एकता को बढ़ावा देना, युवाओं में देशभक्ति जगाना और आम लोगों की पीड़ा को उजागर करना है।

*क्यों मनाया जाता है आतंकवाद विरोधी दिवस*

21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या कर दी गई थी। उनकी हत्या के बाद ही 21 मई को “आतंकवाद विरोधी दिवस” के तौर पर मनाने का फैसला किया गया था।

राजीव गांधी जिस समय रैली को संबोधित कर रहे थे उसी दौरान एक महिला अपने शरीर पर विस्फोटक लगाकर आई। वह राजीव गांधी के पैर छूने के लिए जैसे ही झुकी, तेज धमाका हुआ और इसमें राजीव गांधी समेत 25 लोगों की मौत हो गई। मानव बम बनकर आई इस महिला का संबंध आतंकवादी संगठन एलटीटीई से था।

*आतंकवाद विरोधी कार्यक्रमों का आयोजन*

आतंकवाद विरोधी दिवस के मौके पर वाद-विवाद, लेखन, चित्रकला समेत विभिन्न आतंकवाद विरोधी कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। साथ ही स्कूल और कॉलेज से लेकर सरकारी और निजी कार्यालयों में आतंकवाद के विरोध में शपथ दिलाई जाती है।

*जानिए ,*
*ये है “आतंकवाद विरोधी शपथ”*

*हम भारतवासी अपने देश की अहिंसा और सहनशीलता की परंपरा में दृढ़ विश्वास रखते हैं और निष्ठापूर्वक शपथ लेते हैं कि हम सभी प्रकार के आतंकवाद और हिंसा का डटकर विरोध करेंगे। हम मानव जाति के सभी वर्गों के बीच शांति, सामाजिक सद्भाव और सूझबूझ कायम रखने और मानव जीवन मूल्यों को खतरा पहुंचाने वाली विघटनकारी शक्तियों से लड़ने की शपथ लेते हैं।*