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लखनऊ – – 80 घंटे में सुलझी गुत्थी, दूसरी पत्नी स्मृति ने प्रेमी संग मिलकर रची थी हत्या की साजिश 

80 घंटे में सुलझी गुत्थी, दूसरी पत्नी स्मृति ने प्रेमी संग मिलकर रची थी हत्या की साजिश 

बुधवार, फरवरी 26 2020
प्रभंजन कुमार तिवारी, प्रधान संपादक

लखनऊ(ब्यूरो)। रणजीत बच्चन हत्याकांड में पुलिस अभी शूटर की तलाश कर रही है। उस पर पचास हजार का ईनाम है। पुलिस की 8 टीम ने 80 घंटे में 8 एंगल पर काम करके इस केस का खुलासा किया है। पुलिस ने हत्याकांड में यूज कार और मोबाइल भी बरामद कर लिया है। रणजीत बच्चन की हत्या के बाद खुलासे के लिए आठ टीम बनाई गई। टीम ने घटना से जुड़े पहलू के साथ-साथ करीब 87 लोगों की कॉल डिटेल और 40 सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए, जिससे पुलिस को अहम सुराग मिले। इसके बाद पुलिस ने 8 प्वाइंट पर काम शुरू कर दिया। पुलिस कमिश्नर सुजीत पांडेय ने बताया कि हत्या की घटना को अंजाम देने से पहले हत्यारों ने तीन अलग-अलग दिन रणजीत की रेकी की थी। रेकी उनके ओसीआर बिल्डिंग स्थित आवास से लेकर मार्निग वॉक के प्वाइंट तक की गई थी। सबसे पहले हत्यारों ने 21 जनवरी को फिर 28 और 29 जनवरी को रेकी की थी। 28 जनवरी को रेकी करने के बाद हत्या में शामिल तीनों आरोपी विकासनगर स्थित एक होटल में रूम लेकर रूके भी थे।
वाट्सअप कॉलिंग करती थी स्मृति
रणजीत की दो पत्नी थी। पहली पत्नी गोरखपुर निवासी कालिंदी शर्मा से उसने 2014 में मंदिर में शादी की थी। कालिंदी उसके साइकिल यात्रा के दौरान पांच सदस्यी दल में शामिल थी जबकि दूसरी शादी उसने 2015 में विकासनगर निवासी स्मृति श्रीवास्तव से की थी। स्मृति बापू भवन में स्थित कोषागार निदेशालय में बाबू के पद पर तैनात है। स्मृति ने रायबरेली निवासी अपने प्रेमी दीपेंद्र के साथ मिलकर रणजीत की हत्या की साजिश रची। साजिश रचने के बाद उसने 25 जनवरी से अपने प्रेमी से फोन से बात करनी बंद कर दी। उसने अपने फोन से उसका मोबाइल नंबर व एफबी से एकाउंट भी डिलीट कर दिया था। जरूरत पड़ने पर वह वाट्सअप कॉल पर बात करती थी और फिर उसे डिलीट देती थी।
अचानक कॉल न करने पर गहराया शक
25 जनवरी से पहले स्मृति की दीपेंद्र से लगातार बात हो रही थी। उसके बाद अचानक फोन पर बात बंद होने और घटना स्थल के आस-पास दीपेंद्र के मोबाइल की लोकेशन मिलने पर पुलिस को स्मृति पर शक गहराया। इस पर पुलिस ने स्मृित की कॉल डिटेल खंगालने के साथ दीपेंद्र से उसका कनेक्शन भी खंगालना शुरू कर दिया। कई राउंड उससे पूछताछ भी की गई।
एक झूठ ने खुलासे के करीब पहुंचाया
पुलिस ने स्मृति से दीपेंद्र के बारे में पूछताछ की गई तो पहले उसने इंकार कर दिया। पुलिस ने एक के बाद एक कई सबूत सामने रखे तो स्मृति ने दीपेंद्र के साथ अपने संबंध को स्वीकारा। सीपी सुजीत पांडेय के अनुसार स्मृति की दीपेंद्र से मुलाकात अक्टूबर 19 में हुई थी और दोनों के बीच प्यार का परवान नवंबर में चढ़ था। दीपेंद्र के बड़े भाई यूपीएसआरटी में जॉब करते हैं। एक एक्सीडेंट के दौरान उनकी मुलाकात स्मृति से हुई थी। घायल होने पर स्मृति रायबरेली उनके आवास उसे देखने भी गई थी, जहां दीपेंद्र से पहली बार मुलाकात हुई।
वीडियो कॉल की सुनाई झूठी कहानी
पुलिस ने स्मृति से दीपेंद्र के बारे में जानकारी की तो उसने बताया कि 25 जनवरी को वह मुंबई चला गया है। मुंबई में अपने बड़े भाई का कैंसर का इलाज करा रहा है। वीडियो कॉल करके उसने हाल चला भी लिया था और बड़े भाई से बात भी कराई थी। बस इसी झूठ ने पुलिस के विश्वास को और बढ़ा दिया क्योंकि 25 जनवरी से लेकर 2 फरवरी तक दीपेंद्र के मोबाइल की लोकेशन रायबरेली व लखनऊ में पुलिस को पहले ही मिल चुकी थी।
3.30 बजे निकले थे रायबरेली से
रणजीत की हत्या का दिन 2 फरवरी रविवार मुकर्रर किया गया था। दीपेंद्र बलेनो कार से चचेरे भाई जितेंद्र व ड्राइवर संजीत के साथ एक फरवरी की रात 3.30 बजे रायबरेली से निकला। निगोंगा टोल प्लाजा के सीसीटीवी कैमरे में उसकी गाड़ी फुटेज में कैद हुई है। दीपेंद्र को हजरतगंज के पास ओसीआर बिल्डिंग के पास उतारा गया जबकि शूटर जितेंद्र को कैपिटल चौराहों पर छोड़ कर ड्राइवर संजीत गाड़ी लेकर ग्लोब पार्क के पास खड़ा हो गया।
उलझाने को लूटा था मोबाइल
2 फरवरी को रणजीत बच्चन की हत्या 5.55 बजे से 6 बजे के बीच की गई थी। 5.50 बजे रणजीत आदित्य व कालिंदी के साथ ओसीआर बिल्डिंग से मार्निग वॉक पर निकले थे। दीपेंद्र तीनों के पीछे हो लिये। रणजीत व आदित्य तेज चल रहे थे जबकि कालिंदी थोड़ा पीछे थी। जनपद मार्केट के पास दीपेंद्र व शूटर जितेंद्र आस-पास आ गए, जिनकी फोटो सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई है। कालिंदी दयानिधि पार्क की तरफ चली गई जबकि रणजीत का पीछा कर दोनों ग्लोब पार्क के गेट पर पहुंच गये। जितेंद्र ने 32 बोर की पिस्टल से रणजीत को गोली मारी और आदित्य पर फायर किया। घटना को भ्रमित करने के लिए दोनों के मोबाइल फोन लूट कार में सवार होकर फरार हो गए।
फैक्ट फाइल
– 2 फरवरी को हुई थी रणजीत की हत्या
– 3 तीन हत्यारों ने की थी रेकी
– 87 लोगों की कॉल डिटेल खंगाली थी
– 40 सीसीटीवी की फुटेज देखी थी
– .32 बोर की पिस्टल से मारी थी गोली
– 2 लोगों को पुलिस ने किया गिऱफ्तार
– दूसरी पत्नी के प्रेमी ने चचेरे भाई के साथ गोली मारकर की थी हत्या
– 25 जनवरी से प्रेमी को कॉल करना बंद कर दिया था पत्नी ने
– तीन बार की गई थी रेकी, घटना के दिन 3.30 बजे कार से पहुंचे थे लखनऊ