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रायबरेली – रायबरेली पुलिस द्वारा ऐसी हरकतें, देश का चौथा स्तम्भ माने जाने वाले मिडिया से कर सकती हैं तो आम जनता से कैसे पेश आती होगी।

मृतक उदय राज के परिवारजनों का कहना है कि  भदोखर पुलिस के द्वारा टॉर्चर किया  गया जिससे मजबूरन लड़के को खुदखुशी करनी पड़ी।

रायबरेली सीओ आर पी शाही द्वारा  इण्डिया नाऊ24 के रिपोर्टर को कवरेज करने से रोका और अप्सब्द भी कहे 

रायबरेली पुलिस द्वारा ऐसी हरकतें, देश का चौथा स्तम्भ माने जाने वाले मिडिया से कर सकती हैं तो आम जनता से कैसे पेश आती होगी।

रिपोर्ट – भानू प्रताप
रायबरेली
इंडिया नाऊ 24

रायबरेली जनपद के थाना भदोखर क्षेत्र के अंतर्गत बेला भेला उत्तरपारा में मृतक के परिजनों का कहना है कि मृतक उदय राज को भदोखर थाना पर बुलाया गया था।
थाने में 1 दिन बैठा कर रखा गया और उसे दूसरे दिन छोडा गया उससे रूपयों की भी थाने में डिमांड की गई।

मृतक का नाम उदय राज विश्वकर्मा पुत्र घनश्याम विश्वकर्मा है।
परिवारजनों का कहना है कि आरोपी अशोक तिवारी जो कि गाड़ी पंचर करने का आरोप उदय राज पर 15 दिनों से लगातार लगाता आ रहा था ।
जिस की तहरीर अशोक तिवारी ने उदय राज के खिलाफ भदोखर थाना में दी थी।
परिवारजनों का कहना है कि थाने पर उदय राज को अशोक तिवारी और सूर्यभान तिवारी एसआई द्वारा इतना ज्यादा मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।
8 जुलाई को भदोखर पुलिस उदय राज को घर से उठाती है। और 9 जुलाई को शाम 4:00 बजे छोड़ती है।
मिली जानकारी के मुताबिक कही ना कहीं ऐसा प्रतीत होता है कि भदोखर पुलिस के द्वारा टॉर्चर किया गया है।
जिससे मजबूरन 20 साल के लड़कों को खुदखुशी करनी पड़ी।
मृतक की बहन का कहना है कि आरोपी अशोक ने भदोखर थाने मे रिश्वत देकर मेरे भाई पर दबाव बनाया गया था।
फिर पुलिस द्वारा मेरे भाई से 16 हजार रुपयों की मांग की गई थी।
आखिर भदोखर पुलिस के द्वारा 16 हजार रुपयों की क्यों मांग की गई।
अब सवाल यह उठता है कि क्या पुलिस को सरकार उनकी सैलरी नहीं देती है जो आए दिन इस तरह की घटनाएं सामने आती रहती है।
9 जुलाई को शाम 7:00 बजे लड़का खुद को फांसी लगा लेता है।
इस घटना की खबर मिलते ही पूरे गाँव में अफरा-तफरी मच जाती है।
रात 9 बजे इण्डिया नाऊ24 की टीम घटना स्थल पर कवरेज करने पहुंचती है तो
रायबरेली सीओ द्वारा रिपोर्टर को कवरेज करने से रोका जाता है और सीओ द्वारा मोबाइल ले लिया जाता है।
मिडिया को भीड़ का हिस्सा समझकर सीओ द्वारा गलत तरीके से बात की जाती है।
2 कॉन्स्टेबल द्वारा कवरेज करने गए रिपोर्टरों को डंडों के सहारे बाहर निकाल दिया जाता है।
इससे यह बात स्पष्ट होती है कि रायबरेली पुलिस जब देश के चौथे स्तंभ मिडिया वालों से ऐसी अभद्रता करते हैं तो ये आम जनता से कैसे पेश आते होगे।
एक तरफ सरकार मिडिया को पूरा सहयोग करती आ रही है तो दूसरी तरफ पुलिस का ऐसा बर्ताव सामने आ रहा है।