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रायबरेली-निर्मला सीतारमण इस्तीफा दे किसान, नौजवान व मजदूर विरोधी है यह बजट : आमीन पठान

रायबरेली

निर्मला सीतारमण इस्तीफा दे किसान, नौजवान व मजदूर विरोधी है यह बजट : आमीन पठान

रिपोर्ट अनिल कुमार
इंडिया नाऊ 24
रायबरेली

रायबरेली – रायबरेली के सदर युवक कांग्रेस अध्यक्ष आमीन पठान व राहुल गांधी यूथ ब्रिगेड के प्रदेश सचिव कमल सिंह चौहान ने कल पेश हुए बजट 2020 पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सबको बजट का इंतजार था, आम जनता की सहूलियत के लिए उम्मीद लगाए बैठे थे. जब देश की अर्थव्यवस्था संभल नहीं रही, जॉब जा रही है, मंदी है तो केंद्र सरकार कोई बढ़िया कदम उठाएगी, लेकिन दुख है कि जनता के साथ बहुत बड़ा धोखा है बजट. आम जनता की रोजमर्रा की जरूरतों में इस्तेमाल होने वाली सारी चीजें महंगी हुई हैं, यह उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने वाला बजट है।
आमीन पठान ने कहा बजट का भाषण लंबा जरूर है, लेकिन पूरी तरह से आंकड़ों का मायाजाल और हवाई सपने दिखाने वाला है. उन्होंने कहा कि इस बजट में गांव, गरीब, किसान, युवा ,रोजगार और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कुछ भी नहीं है.
राहुल गांधी यूथ ब्रिगेड के प्रदेश सचिव कमल सिंह चौहान ने कहा कि निर्मला सीतारमण बजट का गणित समझाने में विफल रही हैं. 4.8% की जीडीपी वृद्धि के साथ 2024 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य एक पाइप ड्रीम है। ये दिवालिया सरकार का दिवालिया बजट है। बीजेपी अर्थव्यवस्था को लेकर नाकाम है । यूपी में बीजेपी की सरकार है, लेकिन इन्वेस्टमेंट लाने के नाम पर कुछ नहीं था. रोजगार कैसे पैदा होगा, मोदी सरकार बेरोजगारी के मसले को कैसे दूर करेगी. ये बजट आंकड़ों का मकड़जाल था ताकि अन्य मुद्दों से ध्यान भटकाया जा सके।
नोटबंदी के बाद करदाताओं की संख्या में भारी वृद्धि का केंद्र सरकार का दावा गलत है. वर्ष 2014 में देश में 5.28 करोड़ करदाता थे, जो वर्ष 2018 में बढ़कर 7.14 करोड़ हुए हैं. यह वृद्धि पिछले कई वर्षों में होने वाली औसत वृद्धि दर 10 प्रतिशत के बराबर ही है. 3 वर्ष पहले जीएसटी लागू करने के बाद से अब तक वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम में 350 बार संशोधन किया जा चुका है. बार-बार बदलाव करने से इसके क्रियान्वयन में तो दिक्कत आ ही रही है, राजस्व संग्रहण में भी भारी कमी आई है. त्रुटिपूर्ण जीएसटी के चलते राज्यों को क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान नहीं हुआ है.
चौहान ने कहा कि ‘देश नहीं झुकने दूंगा, देश नहीं बिकने दूंगा’ का दावा करने वाले एक-एक करके देश के सभी बड़े सरकारी उपक्रमों को बेचने में लगे हैं. एयर इंडिया के बाद अब केन्द्र सरकार ने बजट में एलआईसी और आई डी बी आई जैसे संस्थानों को बेचने और भारतीय रेल के निजीकरण का ऐलान कर दिया है. युवाओं, महिलाओं, किसानों और व्यापारियों के लिए केन्द्रीय बजट 2020-21 घोर निराशावादी है।