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रायबरेली – उन्नाव में जन्मे भगवतीचरण वर्मा हिन्दी जगत् के प्रमुख साहित्यकार थे ::  आशीष शुक्ल

रायबरेली – उन्नाव में जन्मे भगवतीचरण वर्मा हिन्दी जगत् के प्रमुख साहित्यकार थे ::  आशीष शुक्ल

अनिल कुमार इंडिया नाऊ 24 रायबरेली

  • रायबरेली ।। उत्तर प्रदेश शिव समाज सेवा उत्थान समिति संस्था अध्यक्ष आशीष शुक्ल ने याद किया साहित्यकार भगवतीचरण वर्मा को श्री वर्मा जी का जन्म 30 अगस्त 1903 को उत्तर प्रदेश उन्नाव जिले के शफीपुर गांव हुआ था भगवतीचरण वर्मा हिन्दी जगत् के प्रमुख साहित्यकार थे। उन्होंने लेखन तथा पत्रकारिता के क्षेत्र में ही प्रमुख रूप से कार्य किया। कवि के रूप में भगवतीचरण वर्मा के रेडियो रूपक ‘महाकाल’, ‘कर्ण’ और ‘द्रोपदी’- जो 1956 में ‘त्रिपथगा’ के नाम से एक संकलन के आकार में प्रकाशित हुए, उनकी विशिष्ट कृतियाँ हैं। यद्यपि उनकी प्रसिद्ध कविता ‘भैंसागाड़ी’ का आधुनिक हिन्दी कविता के इतिहास में अपना महत्त्व है। वर्मा जी ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बी.ए, एल.एल.बी. की परीक्षा उत्तीर्ण की। भगवतीचरण वर्मा जी ने लेखन तथा पत्रकारिता के क्षेत्र में ही प्रमुख रूप से कार्य किया। इसके बीच-बीच में इनके फ़िल्म तथा आकाशवाणी से भी सम्बद्ध रहे। बाद में यह स्वतंत्र लेखन की वृत्ति अपनाकर लखनऊ में बस गये। इन्हें राज्यसभा की मानद सदस्यता प्राप्त करायी गई। भगवतीचरण वर्मा कोई उपदेशक नहीं थे, न ही कोई विचारक, वे जीवन भर सहजता के प्रति आस्थावान रहे, जो छायावादोत्तर हिन्दी साहित्य की एक प्रमुख विशेषता रही। उन्होंने बस अपने आस पास घाट रही घटनाओं को रचना में बदल दिया। भगवतीचरण वर्मा को भूले बिसरे चित्र पर साहित्य अकादमी पुरस्कार और पद्मभूषण से सम्मानित किया गया। 5 अक्टूबर, 1981 को भले ही वर्मा जी की कलम खामोश हो गयी किन्तु उन्होंने अपनी इस कलम से कागज को जितना दे दिया वो हमेशा के लिए अमर हो गया। आज उनके जन्मदिवस पर शिव समाज सेवा उत्थान समिति उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि