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मोदी सरकार जनता कि आजीविकाओं का निर्ममता से विनाश करने में लगी

मोदी सरकार जनता कि आजीविकाओं का निर्ममता से विनाश करने में लगी

रिपोर्टर योगेश गुरूग्राम India Now24

गुड़गाँव ! तेल उत्पादों पर लगाए गए शुल्क घटाने और पेट्रोल डीजल आदि के दामों में जनता को राहत देने की मांग को लेकर गुड़गाँव की भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) व भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्कसिस्ट-लेनिनिस्ट) ने संयुक्त ब्यान जारी कर कहा कि मोदी सरकार जनता कि आजीविकाओं का निर्ममता से विनाश करने में लगी हुई है। यह तब है जब कि महामारी ने और बिना योजना के एकतफ़ा तरीके से घोषित और पूरी तरह से कुप्रबंधित, देशव्यापी लोक डाउन ने, पहले ही गंभीर रूप से आजीविकाओं पर चोट कर दी थी। पिछले तीन सप्ताह से हर रोज पेट्रोल तथा डीजल के दाम बढ़ाए जा रहे हैं। और अब तो ऐतिहासिक तौर से डीजल का भाव 80/-रु. प्रति लीटर कर दिया गया है जो पेट्रोल से भी आगे निकाल गया है। ये करोड़ों देशवासियों के जीवन को और भी पंगू बना रहा है।
वामपंथी पार्टियां मांग करती हैं कि केंद्र सरकार पैट्रोलियम उत्पादों पर अपने उत्पाद शुल्क में, जो दुनिया भर में सब से ऊंचे स्तर पर है,भरी कटौतियाँ करे और जनता को राहत दे। तेल विपणन कंपनियाँ, जनता कि कीमत पर अनाप शनाप मुनाफे बटौर रही हैं। इसके साथ ही साथ, केंद्र सरकार भी बहुत भरी राजस्व भी बटौर रही है। यह जनता के प्रति आपराधिक कृत्य है।
जनता कि प्राण रक्षा कि समस्याओं को हल करने कि बजाए, मोदी सरकार उस पर और ज्यादा हमले कर रही है। इसी संदर्भ में गुड़गाँव कि वाम पंथी पार्टियों दो जुलाई को लघु सचिवालय पर 11 बजे विरोध कार्यवाही स्वरूप प्रदर्शन करेंगे।
तीनों पार्टियों के ज़िला सचिव कामरेड मुरली कुमार, एस एल प्रजापति व कामरेड राम करण पासवान ने कहा की सरकार; पैट्रोलियम उत्पादों पर शुल्क फौरन घाटा कर कीमतें कम करे। आयकर सीमा से नीचे के सभी परिवारों को छ: महीने तक 7500/- रु. प्रतिमाह फौरन दे तथा सभी जरूरत मंदों को 10 किलो अनाज प्रति व्यक्ति प्रति माह निशुल्क दिया जाए।
देश की प्रकृतिक सम्पदा के निजीकरण करने व श्रम क़ानूनों को बदलने के मोदी सरकार के फैसले के खिलाफ, तीन जुलाई को ट्रेड यूनियनों के संयुक्त आह्वान के लिए गुड़गाँव की वामपंथी पार्टियां अपनी एकजुटता व समर्थन का इज़हार करती हैं। पिछले 15 दिनों से धरणे पर बैठे हरियाणा शारीरिक शिक्षा संघ के सेवा मुक्त किए गए शिक्षकों की पुन: बहाली की मांग करती हैं।