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मानवीय मूल्य रहित शिक्षा सभी के लिए व्यर्थ: एसपी जरावता

मानवीय मूल्य रहित शिक्षा सभी के लिए व्यर्थ: एसपी जरावता
 
आज के समय में शिक्षा का हो गया पूरी तरह  व्यापारीकरण
 
शिक्षा, व्यवसाय और सामाजिक सरोकार से हो सरोबार
 
मनुष्य कहीं किसी भी पद पर रहे, मानवीय मूल्य प्रधान

रिपोर्टर योगेश गुरूग्राम India Now24

गुरुग्राम । राव लाल सिंह शिक्षण संस्थान के अधिष्ठाता शिक्षाविद् राव लाल सिंह की 49वीं पुुण्य तिथि के मौके पर मेजबान संस्था में आयोजित वार्षिकोत्सव के मौके पर पटौदी के एमएलए एसपी जरावता ने कहा कि, मानवीय मूल्य के बिना शिक्षा का हमारे जीवन में कोई महत्व नहीं है। मानवीय मूल्य रहित शिक्षा सभी के लिए व्यर्थ है। उन्होंने बेबाक शब्दों में कहा कि, आज शिक्षा का पूरी तरह से व्यापारीकरण हो चुका है। वास्तव में शिक्षा व्यवसाय और सामाजिक सरोकार से सरोबार होनी चाहिये। मनुष्य कहीं भी किसी भी पद पर रहे, हमारे लिये और जीवन में मानवीय मूल्य ही प्रधान होने चाहिये। एमएलए जरावता राव लाल सिंह शिक्षण शिक्षण संस्थान में बतौर मुख्य अतिथि संबांधित कर रहे थे। यहां आगमन पर जरावता का शिक्षण संस्थान परिषद के अध्यक्ष मेजर अशोक यादव, महासचिव आरएस यादव, प्रिंसिपल वंदना गांधी, रावलाल सिंह पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल हेंमा धींगरा, वाइस प्रिंसिपल लता यादव सहित अन्य ने स्मृति चिन्ह और शाल ओढ़ाकर अभिनंदन किया।
कार्यक्रम का आरंभ स्व.राव लाल सिंह के चित्र पर पुष्प अर्पित करने व दीप प्रज्जवल के साथ किया गया। छात्र-छात्राओं ने स्वागतगान सहित सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। इसी मौके पर राज्य के मंत्री आेम प्रकाश ने छात्रों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि आत्म विश्वास के साथ जीवन के पथ पर अग्रसर रहें। समय की मांग है कि छात्र अथवा युवा वर्ग शिक्षा ग्रहण करने के साथ ही , सांस्कृतिक गतिविधियों और कार्यक्रमों में भी अपनी हिस्सेदारी अवश्य निभायें। शिक्षण संस्थाएं छात्रों में सर्वांगीण विकास को प्राथतिकता प्रदान करें।
एसपी जरावता ने आह्वान किया कि, शिक्षण संस्थान अपने सामाजिक दायित्व को भी समझें और जिम्मेदारी को स्वीकारे कि समाज और देश का कोई भी होनहार बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। हमारी इन्हीं शिक्षण संस्थाओं से ही छत्रपति शिवा और डा. कलाम भी निकलकर आये हैं। आज भी अनेक शिवा और डा कलाम जैसे बच्चें मौजूद हैं, इन्हें शिक्षा प्राप्त होती रहे तो देश बहुत आगे जाने के साथ ही और भी मजबूत बनेगा। हमारी प्रतिभा का हमारे ही युवाओं के निर्माण में उपयोग किया जा सकेगा। अनके शिक्षक छात्र अपनी शिक्षा पूरी करके प्रदेश के साथ ही देश के विभिन्न हिस्सों में भविष्य के शिक्षक तैयार कर रहे हैं।
कार्यक्रम के दौरान आमंत्रित अतिथियों को पर्यावरण सरंक्षण के हितार्थ मेजबान संस्था के द्वारा पौधें भेट किये गए। प्रिंसिपल हेमा धींगरा ने विभिन्न गतिविधियों में अव्वल रहे छात्रों के साथ ही वार्षिक रपट भी प्रस्तुत की और छात्रों को पुरस्कृत किया गया।
‘महादेव’ या शिव, नामकरण किया ‘शिवा’
मेजबान शिक्षण संस्था में बीएड के छात्रों के द्वारा पहले हिंद राज्य के संस्थापक गुरिल्ला युद्ध के जनक ‘शिवा जी महाराज ’ के जीवन पर केंद्रित संगीतमय एक घंटे का जीवंत नाटक मुख्य आर्कषण का केंद्र रहा। नाटक का आरंभ गर्भवती जीजा बाई के जीवट और हिंदू राज्य की स्थापना के स्वपन के साथ आरंभ हुआ। जीजा बाई ने प्रसव पूर्व भगवान महादेव के कामना कि , कि पुत्री हो तो मां भवानी जैसी और पुत्र जन्मे तो ज्ञर राम के जैसा ही बने। पुत्र  जन्म के बाद में जीजा बाई नवजात का नाम महादेव या शिव न रखकर पुत्र का नाम शिवाजी राव भोसले ही रखती है। नाटक में बेहद जीवंत तरीके से अफजल खान से लेकर आेरंगजेब के साथ में शिवा जी के द्वारा युद्ध किये जाने सहित हिंदू राज्य की स्थापना के लिए बनाई गई अपनी सेना और युद्ध कौशल का चित्रण किया गया। मराठा स्वाभिमान के लिए शिवा जी ने किस न्रकार से अफजल को मात दी और धोखे से कैदी बनाये जाने के बाद आेरंगजेब की कैद से फलों के टोकरों में संभा राव के साथ कैद से मुक्त हुए, यह देखकर पंडाल में सभी के रोंगटे देशभक्ति और मातृ भूमि के रक्षार्थ किये कार्य से खड़े हो गए। नाटक में मराठा योद्धा शिवा जी के गुरिल्ला युद्ध का जींवत मंचन सभी को रोमांचित कर गया। शिवा जी के हिंदू महराजा के रूप में राज्याभिषेक के साथ नाटक का समापन हुआ।