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बूचावास महंत लक्ष्मण गिरि गौशाला में हवन-यज्ञ का किया आयोजन

बूचावास महंत लक्ष्मण गिरि गौशाला में हवन-यज्ञ का किया आयोजन
 
महाकाल सेवा सदन उज्जैन के कृष्ण गिरि मेजबान
 
गुरुग्राम।   भारतीय सनातन संस्कृति में हवन-यज्ञ अनुष्ठान का विशेष महत्व है और भविष्य में भी रहेगा। किसी भी शुभ अवसर या फिर अपने मार्गदर्शक, आध्यात्मिक ज्ञान प्रदाता को अर्पित-समर्पित हवन-यज्ञ अनुष्ठान परमात्मा कहे या आदि और अंत महाकाल के द्वारा विशेष कृपा के साथ फल भी प्रदान किया जाता है। इसी लक्ष्य को लेकर गांव बूचावास में महंत लक्ष्मण गिरि गौशाला में महाकाल के अनन्यन भक्त और अध्यात्म सहित जन कल्याण को समर्पित महामंडलेश्वर ज्योति गिरि को अर्पित यज्ञ का आयोन, महाकाल सेवा सदन उज्जैन के संचालक कृष्ण गिरि की मेजबानी में किया गया।
करीब दो घंटे तक इस हवन-यज्ञ में महाकाल सहित सभी देवी-देवताओं का आह्वान करने तथा भगवान गणेश को आरंभ में यादकर आहूतियां अर्पित की गई। देशी गाय के गोबर की लिपाई-पुताई से तैयार यज्ञशाला में  देशी गाय का ही शुद्ध घी आहुतियों में अर्पित किया गया। इस हवन-यज्ञ में बूचावास महंत लक्ष्मण गिरि गौशाला के संचालक बिठ्ठल गिरि, वंृदावन महाकाल सेवा सदन के संचालक महंत केशव गिरि, महाकाल सेवा सदन हरिद्वार के संचालक त्रिलोक गिरि ने विशेष रूप में अपनी हाजिरी दर्ज कराते हुए आहुतियां अर्पित की। इसी मौके पर गोपाल गिरि, शंभू गिरि, विद्यानंद गिरि, रवि गिरि सहित अन्य साधु-संतों अलावा बड़ी संख्या में श्रद्धालू भी शामिल रहे।
हवन – यज्ञ के बाद में श्रद्धालूओं को प्रसाद वितरण के समय बिठ्ठल गिरि महाराज ने कहा कि, हमें हमेशा अपने मार्ग दर्शक, सरंक्षक और आध्यात्मिक ज्ञान देकर भगवान अथवा ईष्ठ या फिर भगवान महाकाल के जीवन दर्शन सहित उनके अनंत रहस्य और जन कल्याण के लिए किये गए कार्यो का ज्ञान देने वालों का जीवन पर्यन्त सम्मान करना चाहिये। सबसे बड़ा भगवान वास्तव में हमारी जननी ही है, जो जन्म देने के साथ ही सांसारिकता का परिचय कराती है। लेकिन जीवन का सही में कल्याण केवल आध्यात्मिक ज्ञान से ही संभव है। हवन-यज्ञ करने का अनादि काल से क्रम चला आ रहा है, इसका मुख्य उद्देश्य अपने-अपने ईष्ठ को प्रसन्न करने के साथ ही पर्यावरण को शुद्ध रखना भी है। इसी कार्य में ही सभी जीवों का कल्याण संभव है।