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बीते दौर की विंटेज ब्यूटीज दिखीं मिलेनियम सिटी की सड़कों पर

 बीते दौर की विंटेज ब्यूटीज दिखीं मिलेनियम सिटी की सड़कों पर

21 गन सैल्यूट इंटरनेशनल विंटेज कार रैली और कॉनकाॅर्स डी’एलीगेंस का हुआ शुभारम्भ
15 और 16 फरवरी 2020 को खूबसूरत करमा लेकलैंड्स गोल्फ कोर्स, गुरूग्राम में दुर्लभ विंटेज कारों, इंडियन हेरिटेज और मोटरिंग एलीगेंस का एक समूह अपने आकर्षण को बढ़ाने में सफल रहा
रिपोर्टर योगेश गुरूग्राम India Now24
गुरुग्राम :  21 गन सैल्यूट इंटरनेशनल विंटेज कार रैली और कॉनकाॅर्स डी’एलीगेंस के 9वें संस्करण ने खूबसूरत करमा लेकलेंड्स गोल्फ कोर्स में वसंत की खूबसूरत सुबह को बेहद खूबसूरत विंटेज कारों के एक शोकेस में बदल दिया। ये खूबसूरत विंटेज कारें आज भी देखने वालों को अपने अंदाज से चकित कर देती हैं और उन्हें अपना दीवाना बना लेती हैं।

भारत सरकार के साथ सहभागिता में 21 गन सैल्यूट हेरिटेज एंड कल्चरल ट्रस्ट द्वारा आयोजित वैश्विक तौर पर जानी मानी 21 गन सैल्यूट इंटरनेशनल विंटेज कार रैली और कॉनकोर्स डी’एलीगेंस की शुरुआत राजसी इंडिया गेट पर एक शानदार फ्लैगआॅफ समारोह के साथ हुई।  हुई। इसके बाद महाराजा कार्स एंड मोटरसाइकल के साथ-साथ 150 से अधिक राष्ट्रीय और इंटरनेशनल विंटेज कारों का खूबसूरत डिस्प्ले भी किया गया जो कि भारतीय विरासत और मोटरिंग के जुनून को बढ़ावा देने में सफल रहा।

150$ भव्य विंटेज कारें और 35 विंटेज बाइक्स शानदार फील्ड शो का उद्घाटन मुख्यातिथि माननीय श्री वी.पी. सिंह बदनोर, राज्यपाल, पंजाब और प्रशासक यू.टी. चंडीगढ़ ने किया। उद्घाटन भाषण में, महामहिम वी.पी. सिंह बदनोर ने भारतीय विरासत और मोटरिंग को बढ़ावा देने के महत्व के बारे में बात करते हुए कहा कि “21 गन सैल्यूट इंटरनेशनल विंटेज कार रैली और कॉनकाॅर्स डी’एलीगेंस ने एक अनूठी मोटरिंग पहल शुरू की है, जो भारतीय संस्कृति में समृद्ध ऑटोमोटिव विरासत के विकास को जोड़ती है, जिससे भारत में पर्यटन को बढ़ावा मिलता है। इस पहल का दृष्टिकोण काफी महत्वाकांक्षी है और श्री मदन मोहन ने अपनी मेहनत से अपने इस प्रयास को सफल इंटरनेशन आयोजन में बदल दिया है। इससे  राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन में भारी वृद्धि हो रही है।”

आयोजन की असाधारण विशेषताएं इसे विशेष और बहुत ही आकर्षक बनाती हैं। टेक टाॅक्स,  सांस्कृतिक समारोह और शानदारों कारों की उपस्थिति एक बेहतरीन काॅम्बीनेशन का प्रतिनिधित्व करती हैं जो कि किसी से कम नहीं है, इसलिए ये आयोजन की सबसे खास हिस्सा हैं। किसी भी नई शुरुआत के लिए सबसे पहले पूज्य देव श्री गणेश जी की वंदना के साथ, 21 गन सेल्यूट कॉनकॉर्स की शुरूआत हुई और सभी ने उनको नमन किया।

कॉनकॉर्स वास्तव में गार्डन सेटिंग में दुर्लभ मशीनों को देखने का एक दुर्लभ मौका बन गया और यहां पर कई सारी खूबसूरत कारों को डिस्प्ले किया गया था। इनमें से कई ऐसी कारें थी, जिनसे कार प्रेमी अपनी नजरें ही नहीं हटा पा रहे थे। ये विंटेज मशीनरी के सबसे खास मास्टरपीसेज हैं, जिनको काॅनकाॅर्स में निहारा जा सकता है और इस आयोजन में दुनिया भर से आई कई सारी दुर्लभ, खूबसूरत और इससे पहले कभी नहीं देखी गई कारों को डिस्प्ले किया गया, जो कि मोटरिंग मास्टरपीसेज के तौर पर जानी जाती हैं।

इन कारों में प्रमुख तौर पर 1938 रोल्स-रॉयस 25/30, मासरेटी 3500 जीटी विग्नेल सिडर, 1939 ब्यूक रोडमास्टर कनर्वेटेबल, 1938 लैंसिया एस्टुरा सीरीज 4, 1930 बीएमडब्ल्यू 3/15 डीए2 “कैब्रियोलेट”, 1936 रोल्स रॉयस 25/30 गुर्ने नटिंग कूपे, 1959 जगुआर एक्सके 150एस, 1936 रोल्स रॉयस 25/30, 1951 बेंटले एमके 6 फ्रीस्टोन एंड वेब, 1966 फोर्ड मस्टैंग, 1930 कैडिलैक वी-16 रोडस्टर, और 1959 अल्फा 2000 और कई अन्य शामिल हैं!

कॉनकोर्स ने एक बार फिर भारत के विभिन्न हिस्सों से आई विंटेज कारों को शो फील्ड में स्वागत करने के लिए उत्सुक रहा और इस दौरान जिन कारों को देखा गया, उनमें दरभंगा के महाराजा की 1938 बेंटले एचएच, भोपाल के महाराजा की 1938 बेंटले एचएच, 1966 जगुआर ई-टाइप, 1959 शेवरले इम्पाला, 1946 एमजी टीसी, खिमसार के युवराज धनंजय सिंह की 1936 की मर्सिडीज-बेंज टाइप 290, राजकोट के ठाकोर साहेब मान्धातासिंहजी जडेजा की 1947 पैकर्ड क्लिपर, डूंगरपुर के युवराज श्री हर्षवर्धन सिंह की 1947 पैकर्ड डीलक्स क्लिपर शामिल है। उनके साथ ही कई अन्य आकर्षण जिनमें गौतम हरि सिंघानिया की 1909 रेनाॅ एएक्स, 1903 कैडिलैक मॉडल ए, 1939 रोल्स-रॉयस व्रेथ, 1937 पियर्स-एरो आठ, 1951 जगुआर एक्सके 120 और 1932 एमजी जे2 भी इस आयोजन में दिखीं।

1934 लैगोंडा एम45 रैपिड, 1935 बेंटले बाय एंटेम ड्रोफेड, 1921 फिएट कोरसा, 1923 लैंचेस्टर 40 एचपी टूरर, 1930 स्टुट्ज़, सीरीज़ एम, पेबल बीच कैटेगरी भी काॅनकोर्स शो फील्ड पर खूबसूरत रत्नों की तरह चमक गई।

कला और विज्ञान के संरक्षक और बुद्धि और ज्ञान के देवता, की वंदना के बाद कथकली के रूप में एक सुंदर कहानी-नाटक, आध्यात्मिक विचारों को व्यक्त करने वाला एक बहुत ही सुंदर भरतनाट्यम प्रदर्शन, पूजा का एक अनुष्ठान -थ्ययम, आदिवासी नागा शिकारी नृत्य प्रदर्शन , मोहिनीअट्टम-नाट्य शास्त्र, भव्य रचना, कश्मीरी का घूमर, पंजाबी भंगड़ा, और कुचिपुड़ी नृत्य, नाटक प्रदर्शन और कई अन्य खूबसूरत नृत्य प्रदर्शन थे जो मोटरिंग आयोजन की आभा बढ़ाने में सफल रहे। इन प्रस्तुतियों ने वैश्विक मंच पर भारतीय संस्कृति को प्रोत्साहित किया।

कॉनकॉर्स में 34 इंटरनेशनल मोटरिंग जजों की विशेषज्ञता और अनुभव को देखा, जो आॅटोमोटिव रेस्टोरेशन जैसे एक दिलचस्प विषय पर टेक टॉक में शामिल हुए। ये टेक टाॅक काफी अधिक उपयोगी, लाभदायक, रचनात्मक और काफी खुले माहौल में हुआ जो कि इस संबंध में दिलचस्पी रखने वाले लोगों के लिए काफी नया अनुभव साबित हुआ।

ग्लोबल मोटरिंग टूरिज्म मैप पर भारत को आगे ले जाने के बारे में बात करते हुए, श्री मदन मोहन, चेयरमैन एवं ट्रस्टी, 21 गन सेल्यूट हेरिटेज एंड कल्चरल ट्रस्ट ने कहा, “इस साल, हम सबसे प्रभावशाली और भव्य शाही अभियान – द इनक्रेडिबल इंडिया रैली का शुभारंभ करेंगे। 4000 किलोमीटर लंबी रैली को गुरूग्राम से हरी झंडी दिखाई जाएगी और यह पूरी तरह से हमारे देश के सबसे जीवंत और शाही राज्यों – हरियाणा, उत्तर प्रदेश, गुजरात और राजस्थान की सांस्कृतिक विविधता और शाही विरासत को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित करेगी।

रैली में यूएसए, यू.के., जर्मनी, फ्रांस, बेल्जियम, इटली, कनाडा और अन्य देशों के 10 मोटरिंग को लेकर उत्साही प्रतिभागी अपने शानदार मास्टरपीसेज के साथ इंटरनेशनल भागीदारी भी करेंगे। पर्यटन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा समर्थित, इन्क्रेडिबल इंडिया रैली भारत की सबसे विशिष्ट और अविस्मरणीय हेरीटेज रैली होगी।“

सम्मानित जजों में से एक, पीटर लार्सन, जो कि डेनमार्क से आए थे, ने कहा कि “भारत में आना हमेशा एक खुशी भरा अनुभव रहा है। मदन और मैं विंटेज के हमारे प्यार के आधार पर एक मजबूत बंधन साझा करते हैं और हर साल मैं इस रोमांचक आयोजन के एक और संस्करण के लिए उनके निमंत्रण के लिए उत्सुक रहता हूं। इसका 9वां एडीशन भी उतना ही अधिक बेहतरीन है। मैं ये कह सकता हूं कि ये आयोजन हर साल पहले से और बेहतर हो रहा है।”

काॅनकाॅर्स में भारत के कई जाने माने मेहमानों और कई गणमान्य लोगों का स्वागत किया गया। वहीं कई सारे सीआईपी, वीआईपी और भारत के पूर्व राजघराने से लेकर कई शाही परिवार, जिनमें राजपरिवार, करौली, राजपीपला, मनसा, डूंगरपुर, वांकानेर, टिहरी-गढ़वाल, बदनोर और कई अन्य शामिल हैं, इस आयोजन में मौजूद रहे।

इस आयोजन की प्रशंसा करते हुए, फीवा प्रेसिडेंट-टिड्डो ब्रेस्टर्स ने कहा कि “21 गन सैल्यूट मेरे लिए एक बहुत बड़ा सरप्राइज रहा है। यह पहली बार है कि मैं इस शो का हिस्सा हूं और मैं पूरी तरह से सकारात्मक हूं कि इस शो का आगे चलकर काफी अधिक प्रभाव पड़ने वाला है और ये दुनिया भर के मोटरिंग प्रशंसकों को अपनी तरफ आकर्षित करेगा। जिस तरह से भारत में हेरिटेज मोटरिंग देखी जाती है, उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि भविष्य में काफी लोग इससे जुड़ेंगे।“ देश में प्रमुख कॉनकाॅर्स में से एक और एशिया में सबसे बड़ी मान्यता प्राप्त इस खास आयोजन ने कॉनकॉर्स डीएलीगेंस के लिए डिजाइन, भव्यता और शिल्प कौशल पर ध्यान केंद्रित करने के साथ अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजारों के कुछ सबसे अच्छे मास्टरपीसेज को एक साथ प्रस्तुत किया है। आयोजन घटना के पहले दिन से लेकर अंत तक सभी उम्र के लोगों के लिए काफी शानदार और अलग सहभागिता अवसर हैं। काफी नए लोगों को भी आपस में मिलने का मौका मिला है।”