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बच्चियों के साथ हुये दरिन्दगी पूर्ण बलात्कार के प्रकरण में दिल्ली की साकेत कोर्ट द्वारा दिये गये निर्णय का स्वागत किया

 

कांगे्रस के वरिष्ठ नेता श्री प्रमोद तिवारी ने मुजफ्फरपुर आश्रय गृृह (षेल्टर होम) में बच्चियों के साथ हुये दरिन्दगी पूर्ण बलात्कार के प्रकरण में दिल्ली की साकेत कोर्ट द्वारा दिये गये निर्णय का स्वागत किया है । उन्होंने कहा है कि इस प्रकरण के मुख्य अभियुक्त बृृजेष ठाकुर को, जिन्हें पांॅच साथियों सहित जहांॅ ताउम्र जेल की सजा सुनाई है, वहीं 7 अन्य दोषियों को भी उम्रकैद की सजा न्यायालय द्वारा सुनाई गयी है । इस प्रकरण में तथ्य इतने अधिक पीड़ादायक और दुःखद थे कि न्यायाधीष श्री सौरभ कुलश्रेष्ठ फैसला सुनाते समय स्वयं भावुक हो गये, और आश्रय गृृह में बच्चियों के साथ हुये इस घिनौने कृृत्य को ‘‘बूचड़खाने की संज्ञा’’ दी।
भारतीय जनतापार्टी के पूर्व मन्त्री चिन्मयानन्द काण्ड के बाद दोष सिद्ध मुख्य अभियुक्त बृृजेष ठाकुर की पत्नी और बिहार सरकार मेें भा.ज.पा.- जे.डी.यू. सरकार की कैबिनेट मन्त्री थी, फिर भी यह अमानवीय अपराध होते रहे। कैबिनेट मन्त्री होने के बावजूद वे अपने पति को बचाने के लिये पति के हर पाप के समय उनकी अर्धांगनी बनी रही। यह इतना दुःखद और पीड़ादायक है कि आश्रय गृृह में रहने वाली बच्चियों, जिनमें ज्यादातर नाबालिक थी, उन्हें बड़े अधिकारियों और राजनैतिक रसूखवाले नेताओं के सामने नषे का इंजेक्षन लगाकर बलपूर्वक परोसा जाता रहा, उनकी चीख- पुकार की आवाज भा.ज.पा.- जे.डी.यू. सरकार की सत्ता की हनक में दबायी जाती रही ।
श्री तिवारी ने कहा है कि मा. न्यायालय के निर्णय से साफ है कि जब बच्चियांॅ इसका विरोध करती थी तो यही मन्त्री पति उन्हें डंडों से मारता पीटता था और बच्चियों को वीभत्स यातनायें देता था, यह शताब्दी के भयंकरतम्् जघन्य अपराधों में से ‘‘एक’’ है, जो सालों साल सत्ता के संरक्षण में फलता- फूलता रहा। मा. न्यायालय के निर्णय के बाद क्या भारतीय जनतापार्टी का शीर्ष नेतृृत्व बहानेबाजी छोंड़कर क्षमा मांगेगा ?
श्री तिवारी ने कहा है कि मा. न्यायालय का यह निर्णय ‘‘सुषासन बाबू’’ का तमगा ओढ़े श्री नितीष कुमार जी को 7 – 8 माह बाद बिहार में होने वाले चुनाव में वहांॅ की जनता उन्हें सजा देगी । क्योंकि उनकी ही सरकार में उनकी ही कैबिनेट मन्त्री ने इस घिनौने कृृत्य को चलने दिया, और तब तक इसमंें निष्पक्ष जांॅच नहीं हो सकी, जब तक माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने इस प्रकरण को ब्ण्ठण्प् को नहीं सौंपा, और मुकदमें को दिल्ली नहीं स्थानांतरित किया ।
श्री तिवारी ने कहा है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय का यह अविष्वास सीधे- सीधे नितीष बाबू के सुषासन पर ‘‘काले कलंक’’ के समान है- क्योंकि यदि ऐसा नहीं होता तो न तो प्रकरण में निष्पक्ष जांॅच हो पाती, और न ही न्यायालय के समक्ष सच्चाई आ पाती, जिससे मा. न्यायालय अपना निष्पक्ष फैसला दे पाता ।
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(प्रमोद तिवारी)