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पुलिस के लिए सिरदर्द बन चुका, वीपीआर कंपनी।के संजीव चंचनी।

पुलिस के लिए सिरदर्द बन चुका, वीपीआर कंपनी।के संजीव चंचनी।

आए दिन विवादों में घिरे जा रहा वीपीआर प्रोजेक्ट मैनेजर संजीव चंचनी पुलिस आखिर क्यों नहीं कर रही है कार्रवाई

रविन्द्र कुमार गुप्ता
रिपोर्टर-इडिंया नाऊ24

ऊर्जाचल शक्तिनगर थाना अंतर्गत एनसीएल खड़िया परियोजना में ओवरबर्डन के कार्य कर रही वीपीआर। कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर संजीव चंचनी। इनके खिलाफ आए दिन सोनभद्र। शक्तिनगर थाने व। सिंगरौली के जयंत चौकी में। पीड़ित द्वारा तहरीर दिया जाता है।पुलिस के लिए सिरदर्द बन चुका यह वीपीआर कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर संजीव चंचनी आखिर क्या कारण है, पुलिस। क्यों नहीं करती है कार्रवाई, आपको बताते चले कि एनआईटी के गाइडलाइन के तहत। विस्थापितों। को रोजगार।देने का परसेंटेज जो देना चाहिए व नहीं दिया जा रहा है। वही सूत्रों। के जानकारी के अनुसार। वीपीआर कंपनी के संजीव चंचनी अपने दबंगई से विस्थापितों को ना रखकर। दलालों के माध्यम से। एक से डेढ़ लाख रुपया लेकर भर्ती कराई जा रही है। जिससे गरीब विस्थापित। मजदूर अपने हक के लिए। दर-दर की ठोकरें खाता रहता है। जब कैंप में जाना चाहते हैं तो उसके गुर्गो द्वारा रोक दिया जाता है वह मारपीट किया जाता है। इससे पूर्व में भी। बीजेपी के पदाधिकारी। वह। कई ऐसे संगठनों के साथ मारपीट। वह गाली गलौज। इसके बाद आने तक मामला पहुंचने के बाद। मामला सब रफा-दफा हो जाता है, जब विस्थापित गरीब को जातिसूचक शब्दों का प्रयोग तक करते हैं।उन्हें डराया धमकाया जाता है जब पीड़ित स्थानीय थाने में लिखित रूप से तहरीर देकर। कार्रवाई का मांग किया जाता है। तो आखिर पुलिस क्यों नहीं करती है कार्रवाई,

आपको पता होगा पूर्व में। बिना। में स्थित एक ओवरबर्डन कंपनी में रोजगार को लेकर एक युवक ने आत्मदाह कर लिया था जिसके कारण उस व्यक्ति की मौत हो गई थी। आखिर एनसीएल।खड़िया के अधिकारी ऐसे प्रोजेक्ट मैनेजर के खिलाफ। कोई उचित और ठोस कार्रवाई क्यों नहीं करते? कहीं एनसीएल के आला अधिकारियों का संरक्षण तो नहीं

*कहीं शासन प्रशासन। वीपीआर। कंपनी में कोई बड़ा हादसा होने का इंतजार तो नहीं कर रहे हैं, समय रहते अगर उचित और ठोस कार्रवाई कर दे।तो कोई बड़ा हादसा टल सकता है।*