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निघासन क्षेत्र की इकलौती बेलरायां चीनी मील जो भ्रष्टाचार के कारण आसूँ बहा रही है।

निघासन खीरी
निघासन क्षेत्र की इकलौती बेलरायां चीनी मील जो भ्रष्टाचार के कारण आसूँ बहा रही है।

सरजू सहकारी चीनी मिल बेलरायां में मरम्मत का कार्य के नाम पर महज खाना पूर्ति जिससे गन्ना किसानों में बनी चिंता बहुत जल्द किसानों का एक दल सूबे के मुख्यमंत्री व गन्ना आयुक्त से मिलकर चीनी मिल में फैली खाऊ-कमाऊ नीति के बारे में अवगत कराकर मील अधिकारियों की जांच व ठेकेदार द्वारा कराए जा रहे कार्यों व उनको दिए जाने वाले भुगतान की जांच की मांग करेंगा। क्षेत्र की लाइफ-लाइन कही जाने वाली सरजू सहकारी चीनी मिल बेलरायां कभी पुरे सीजन में 83 लाख 23 हजार कुंतल गन्ना पेरकर नेशनल एवार्ड पाकर क्षेत्र का नाम रोशन करने के साथ-साथ फायदे में चल रही थी लेकिन भ्रष्टाचार की दीमक ने धीरे-धीरे इस चीनी मिल को काल के अंधेरे में लाकर खड़ा कर दिया है। और आज चीनी मिल अरबों के घाटे से जूझ कर अपने अंतिम दौर में चल रही है।
लोगों का मानना है कि अगर बुद्धजीवी वर्ग तथा प्रदेश की भाजपा सरकार ने बेलरायां चीनी मिल में फैली भृष्टाचार की जांच न कराई तो वो दिन दूर नही जब कर्ज के बोझ तले दबकर चीनी मिल अपनी अंतिम साँसे लेकर बन्द हो जाएगी। चीनी मिल बन्द हो इससे पहले क्षेत्र के बुद्धिजीवियों ने सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर मिल में चल रही खाउकमाऊ नीति से अवगत कराकर जांच कराए जाने की मांग करेंगे। मिल के संचालक गुरमीत सिंह ने सहारा से बात करते हुए बताया कि चीनी मिल में संचालक बनने के बाद मालूम हुआ कि मिल में भृष्टाचार की जड़े काफी मजबूत है। चाहे मिल में मरम्मत के भुगतान की हो या फिर मिल में लगने वाली मशीनरी की सप्लाई हो या सल्फर चूना कास्टिक केमिकल किसी चीज का कोई मानक नही कमीशन के चलते सस्ती सल्फर चुना कास्टिक केमिकल मंगवाने का नतीजा आज सभी के सामने है कि बेलरायां मिल की चीनी का कोई खरीददार नही है। आखिर इस खराब चीनी बनाने का जिम्मेदार कौन है। इसकी जांच होनी चाहिए।
पूर्व संचालक वीरेन्द्र वर्मा ने बताया कि उनकी जानकारी के मुताबिक मिल में मरम्मत का कार्य सन्तोष जनक नही हो रहा है। सरकार की तरफ से जो भी बजट मिला है वो मरम्मत में खर्च नही हो रहा है। सूत्रों की माने तो मिल प्रशासन इस सत्र में मरमत के नाम पर मात्र खाना पूर्ति कर किसानों के साथ छलावा कर रहा है। मजबूर होकर किसानों का एक दल बहुत जल्द सूबे के मुख्यमंत्री तथा गन्ना आयुक्त से मिलकर मिल में फैले भ्र्ष्टाचार तथा मिल में हो रहे कार्यों तथा ठेकेदारों को दिए जाने वाले भुगतान की जांच की मांग करेगा। चीनी मिल के उपाध्यक्ष अमनदीप सिंह ने कहा की मिल मरम्मत का कार्य सन्तोष जनक नही हो रहा है। और ठेकेदारों को मिल द्वारा दिए जा रहे भुगतान की जांच कराई जाएगी। सिंह ने कहा कि मिल प्रशासन द्वारा सल्फर चूना कास्टिक केमिकल तथा अन्य जो भी सामान मिल में बाहर से मंगवाया गया है उसकी भी जांच कराने की बात कही।
जसवन्त कुमार वर्मा, इडिया नाउ 24,निघासन खीरी