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नई शिक्षा नीति भविष्य का भारत के लिए एक गेम चेंजर कदम होगा ÷ सौरभ सिंह

नई शिक्षा नीति भविष्य का भारत के लिए एक गेम चेंजर कदम होगा ÷ सौरभ सिंह

विश्व हिन्दू महासंघ के जिलाउपाध्यक्ष सौरभ सिंह ने बताया कि इस समय जो नई शिक्षा नीति आयी है, उसने इसे स्वीकारा है कि हर बच्चे को भारत की संस्कृति से परिचित होना चाहिए, देश के इतिहास और विरासत को जानना चाहिए।
यह नीति आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। भारत के सम्मानित नागरिक शिक्षा के क्षेत्र में प्राथमिक से लेकर उच्च स्तर शिक्षा तक बदलाव का इंतजार कर रहे थे।
भारतीय मूल्यों के अनुरूप तथा वैश्विक मानकों पर खरा उतरने योग्य शिक्षा नीति की आवश्यकता देश को लंबे समय से थी, जिन बड़े सुधारों की आवश्यकता भारत की जनता लंबे समय से कर रही थी, उन सुधारों पर सरकार ने ध्यान दिया है। सबसे अच्छी बात यह है कि 5 वीं कक्षा तक के छात्रों को मातृ-भाषा, स्थानीय भाषा और राष्ट्र भाषा में पढ़ाया जाएगा।
हम आशा करते हैं कि ये परिवर्तन करोड़ों की संख्या वाले भारतीय छात्र समुदाय के सपनों को पंख देगा। सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि बिना किसी देरी के नए सुधार जमीनी स्तर पर संभव‌ हों।
किसी देश की शिक्षा नीति ऐसी नही बन सकती, जिससे हर को सन्तुष्ट हो। भारत जैसे विविधतापूर्ण देश मे ऐसी अपेक्षा करना तो अनुचित ही होगा। इसमें सबसे बड़ी आवश्यकता यह होगी कि सरकार वे संसाधन उपलब्ध कराए जिससे सरकारी स्कूलों की साख बढ़े, क्योंकि मेरा मानना है कि भारत के समेकित और समग्र विकास का रास्ता गाँवो के प्राइमरी स्कूलों से होकर जाता है। शिक्षा नीति तभी सफल होगी, जब सरकार के साथ समाज भी सजग होकर उसमे सहायता करें और उसका निरीक्षण भी करे।