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झारखंड किसी की जागीर नहीं,  एक इंच भी गड्ढा खोदने नहीं दिया जायेगा :  फुरकान अंसारी

कोल ब्लॉक नीलामी मामले में राज्य की राजनीति गरम

चंदन कुमार गुप्ता
डिस्ट्रिक्ट रिपोर्टर इंडिया नाऊ 24
रांची झारखंड

Jamtara : झारखंड के कोल ब्लॉक की नीलामी मामला पर राजनीति गरम है. दिन प्रतिदिन प्रतिक्रिया मिल रही है. आज गोड्डा के पूर्व सांसद सह कांग्रेस के वरिष्ठ नेता फुरकान अंसारी ने मोदी सरकार पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. कहा कि झारखंड मोदी की जागीर नहीं है.
प्रधानमंत्री मोदी ने कोल ब्लॉक नीलामी में झारखंड सरकार की कोई राय नहीं ली. जबकि झारखंड राज्य के 39 फीसदी कोल ब्लॉक सुरक्षित यानी रिज़र्व है.
झारखंड में आम जनता की सरकार है

कहा कि झारखंड प्रधानमंत्री मोदी जी की जागीर नहीं है कि जो चाहेंगे वह निर्णय ले लेंगे. इसे किसी भी हालत में हमलोग होने नहीं देंगे. झारखंड में आम जनता की सरकार है. झारखंड वासियों की सरकार है तो केंद्र सरकार यहां के लोगों को विश्वास में लिए बिना इतना बड़ा निर्णय कैसे ले सकती है.
पूर्व सांसद ने कहा की केंद्र सरकार ने सिर्फ कोल ब्लॉक की नीलामी का ही निर्णय नहीं लिया है बल्कि इसे प्राइवेटाइजेशन करने तक का भी मन बना लिया है. जो कोल सेक्टर के लिए घातक है. झारखंड में देश का 39% कोल रिजर्व है. केंद्र सरकार को चाहिए था कि वह इस दिशा में पारदर्शिता अपनाये.

आर्थिक सर्वे होना जरूरी

राज्य को होने वाले फायदे का भरोसा दिलाना चाहिए था. परंतु केंद्र सरकार ने बिना किसी बातचीत के नीलामी प्रक्रिया शुरू कर दी. जिस वजह से राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट तक जाना पड़ गया. खनन के कारण विस्थापन की समस्या अब तक बरकरार और उलझी हुई है. कोल ब्लॉक की नीलामी से पहले झारखंड में सामाजिक आर्थिक सर्वे होना जरूरी था. ताकि उससे पता चले कि पूर्व में हुए खनन से हमें क्या लाभ अथवा हानि हुई.
ऐसे कई बिंदु हैं जिस पर केंद्र सरकार को राज्य सरकार से तालमेल मिलाकर बातचीत करनी चाहिए थी. परंतु केंद्र सरकार का रवैया नकारात्मक है जो साफ साफ दिख रहा है. केंद्र सरकार को कोल ब्लॉक नीलामी प्रक्रिया में इतनी हड़बड़ी या जल्दीबाजी नहीं दिखानी चाहिए. आज पूरा देश कोरोनावायरस की चपेट में है और कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या लगभग चार लाख पार कर चुकी है.
परंतु सरकार की नजर इस पर नहीं,  बल्कि कोयले पर टिकी हुई है. जिसे झारखंड की जनता कतई बर्दाश्त नहीं कर सकती.

सर्वदलीय बैठक की जरूरत नहीं

पूर्व सांसद ने सरयू राय द्वारा कोल ब्लॉक आवंटन संबंधी सर्वदलीय बैठक बुलाए जाने की मांग को लेकर भी कहा कि मुझे सरयू राय जी का बॉडी लैंग्वेज समझ में नहीं आता. कभी वह हेमंत सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट जाने का निर्णय का स्वागत करते हैं तो कभी इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग करते हैं. कोल ब्लॉक आवंटन विषय पर राज्य सरकार अपने मंत्रिमंडल एवं अपने विधायकों से निर्णय लेगी.
इसमें सभी दल के नेताओं को बुलाने की आवश्यकता नहीं है. राज्य सरकार निर्णय लेने के लिए सक्षम है.