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जौनपुर – आईपीआर के लिए विचार, अन्वेषण और उत्पाद नए होः प्रो. शर्मा !Indianow24

आईपीआर के लिए विचार, अन्वेषण और उत्पाद नए होः प्रो. शर्मा

विश्वविद्यालय में शोध का डंका वैश्विक स्तर पर बजाने के टिप्स दिए

दो दिवसीय वेबिनार के पहले दिन बताई गई पेटेंट की महत्ता

अमित तिवारी ब्यूरो चीफ जौनपुर

जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर के बौद्धिक संपदा अधिकार प्रकोष्ठ की ओर से शुक्रवार को दो‌ दिवसीय वेबिनार का आयोजन किया गया।

इस अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. भगवती प्रकाश शर्मा ने विश्व व्यापार संगठन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय दवा कंपनियों में विश्व व्यापार संगठन के माध्यम से वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई है आयुर्वेद के क्षेत्र में हमारे पास बेहतर विकल्प है इस पर हमारे युवा वैज्ञानिकों को विचार करने की जरूरत है। उन्होंने विश्वविद्यालय कैंपस में हो रहे महत्वपूर्ण शोध का डंका विश्व स्तर पर कैसे बजे इस बारे में टिप्स दिए। बौद्धिक संपदा अधिकार प्राप्त करने के लिए विचार अन्वेषण या उत्पाद एकदम नया होना चाहिए वह किसी भी पुराने का परिवर्तित या उन्नयन रूप ना हो । इसे प्रोफेसर शर्मा ने दवा कम्पनी नोवर्टिस बनाम भारत सरकार केस के माध्यम से समझाया।

अध्यक्षीय संबोधन पूर्वांचल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.(डॉ.) राजा राम यादव ने किया | उन्होंने बौद्धिक सम्पदा अधिकार को भारतीय परिप्रेक्ष्य में समझाया | प्रो. यादव ने कहा कि कैसे अमेरिका ने नीम का पेटेंट करा लिया था और फिर बाद बीएचयू ‌के प्रो. यू. पी. सिंह ने उस पेटेंट को निरस्त कराया | वर्तमान समय और आने वाला समय तकनीकी और नवाचार का युग हैं | हमें अपनी परम्परागत धरोहर की सम्पदा को संरक्षण के साथ-साथ नवाचार के माध्यम से देश में निर्मित नए उत्पादों को संरक्षित करना होगा|

नई दिल्ली के वैज्ञानिक एवं टीआईएफएसी पेटेंट के हेड डॉ यशवंत देव पवार ने संजीवनी, जीवनी और कोरोना के बाद के संकट पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि रामायण में लक्ष्मण जी जब मेघनाथ के नागपाश से मूर्छित हुए तो उस समय सुषैन वैद्य को बुलाया गया। उन्हें इसलिए बुलाया गया की संजीवनी बूटी की जानकारी उन्हीं के पास सिर्फ थी। यानी उस काल में संजीवनी बूटी पर बौद्धिक संपदा का अधिकार सुषैन वैद्य के पास था। इसी तरह केरल में जीवनी नाम का एक पौधा होता है जिसके पत्ते के रस से शरीर की सारी थकावट दूर हो जाती है किरण ने इसका पेटेंट‌ कराया है। उन्होंने कहा कि बौद्धिक संपदा के संरक्षण का कानून समाज कल्याण के लिए बनता है, हर काल में इसका संरक्षण अलग अलग तरीके से होता रहा है।

सीएसटी की संयुक्त सचिव डॉ. हुमा मुस्तफा ने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में शोध कार्य तेजी से हो रहे हैं इन क्षेत्रों में हमें पेटेंट और बौद्धिक संपदा अधिकार के तहत सचेत रहना चाहिए ताकि हमारी मेहनत पर अन्य कोई देश पानी न फेर दे।

वेबिनार के संयोजक बायोटेक्नोलॉजी विभाग के सह आचार्य डॉ. मनीष कुमार गुप्ता ने ‘इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट: प्रोटेक्शन ऑफ इंटलेक्चुअल प्रॉपर्टी एंड वे फॉरवर्ड’ विषय पर विस्तार से प्रकाश डाला।

वेबिनार का संचालन रसायन विज्ञान विभाग के डॉ नितेश जायसवाल ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉक्टर सुनील कुमार किया। कार्यक्रम की रूपरेखा प्रो. राम नारायण, डॉ. राजकुमार, डॉ.मुराद अली, डॉ पुनीत कुमार धवन, रामनरेश यादव, श्री प्रशांत यादव आशीष कुमार गुप्ता ने बनाई । इस अवसर पर 1000 से अधिक लोगों ने प्रतिभाग किया।