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गाजीपुर – महिला महाविद्यालय बालिकाओं की शिक्षा के लिए मील का पत्थर

गाजीपुर : राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय के स्थापना दिवस पर काव्य पाठ एवं परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस दौरान महाविद्यालय की स्थापना से लेकर अब तक उसकी यात्रा के बारे में चर्चा की गई और लड़कियों के उच्च शिक्षा के क्षेत्र में इसे मील का पत्थर बताया गया। महाविद्यालय के संक्षिप्त इतिहास को बताते हुए डा. संतन कुमार राम ने कहा कि तत्कालीन शिक्षामंत्री कालीचरण यादव के प्रयास से इस महाविद्यालय की स्थापना तीन दिसंबर 1977 को हुई थी। तब से लेकर अब तक यह महाविद्यालय नित नई ऊंचाई की ओर अग्रसर है।

मुख्य अतिथि वरिष्ठ कवि हरिनारायण हरीश ने अपनी कविता पाठ से पूर्व महाविद्यालय के स्थापना संबंधी संस्मरण सुनाते हुए कहा कि कालीचरण की दूर दृष्टि का प्रतिफल यह महाविद्यालय है। उन्होंने अपनी रचना कर्ण, धरती की बेटी और शकुंतला का पाठ कर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया जिसका एक अंश है- ‘जाति, वंश और धन को प्रतिभा से अधिक महत्व मानने वाले समाज से आज भी कर्ण सवाल कर रहे हैं- कर्ण हूं, मैं भी महाभारत का हिस्सेदार हूं। तो क्या तुम्हारी लेखनी का मैं हकदार नहीं हूं?’ शकुंतला के माध्यम से वह आदिवासी जीवन की कथा कह कर समकालीन विमर्श को जोड़ दिया- ‘मैं भरत हूं, यह भारत मेरा है, आरंभ से ही यहां अपना डेरा है और मां शकुंतला आदिकाल से है यहां की निवासिनी, आज उसे कहते हैं लोग आदिवासिनी’।

अनंत देव पांडेय ने अपनी भोजपुरी कविता से सबको सम्मोहित करते हुए ‘गउवां गांव बुझाते नइखे..’ कविता का पाठ किया तो सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। उन्होंने इस कविता के माध्यम से आज के गांव और परंपरागत गांव के जीवन में अंतर को रेखांकित किया। इसके अलावा उन्होंने नीति परक कुछ छंदों का भी पाठ किया। आदमी की जिदगी अधूरी देखिए, आदमी की आज मजबूरी देखिए। आदमी बनाने वाला एक ही है मगर, आदमी से आदमी की दूरी देखिए। प्राचार्य डा. सविता भारद्वाज ने कहा कि गाजीपुर के मनीषियों का स्नेह इस महाविद्यालय को इसी प्रकार से प्राप्त होता रहे। डा. शंभू शरण प्रसाद ने प्रेरणादाई कविताओं का पाठ कर सबकी संवेदनाओं को छू लिया। डा. शशिकला जायसवाल ने ‘बीती विभावरी जाग री..’ का पाठ किया। छात्राओं की तरफ से श्वेता, पूजा, खुशबू और शिवानी ने बहुत ही अच्छी कविताओं का पाठ किया। इस अवसर पर अतिथियों एवं प्राचार्य द्वारा परिसर में पौधारोपण कर स्थापना दिवस को यादगार बनाया गया। कार्यक्रम का संयोजन एवं संचालन डा. निरंजन कुमार यादव ने किया। इस अवसर पर महाविद्यालय परिवार उपस्थित रहा।