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किसी भी काम को करने के लिए हमारी अपेक्षा होती है कि सरकार इसे करवाए या मदद करे

बहराइच ब्रेकिंग न्यूज

किसी भी काम को करने के लिए हमारी अपेक्षा होती है कि सरकार इसे करवाए या मदद करे

रिपोर्ट -इंडिया नाउ 24 राहुल कुमार गौतम बहराइच

किसी भी काम को करने के लिए हमारी अपेक्षा होती है कि सरकार इसे करवाए या मदद करे, लेकिन अगर आम आदमी भी ठान ले तो बगैर सरकारी सुविधाओं के भी वह काफी कुछ कर सकता है। ऐसा ही कुछ संकल्प ज्ञान-विज्ञान के इस युग में पर्यावरण प्रेमी भगवानदास लखमानी ने किया है। पल-पल बिगड़ रही आबोहवा को सुधारने के लिए नीम, पीपल, बरगद, पकड़िया के पौधों को लगाने के साथ ही वन्यजीवों को संरक्षित करने के लिए उन्होंने अपने को समर्पित कर दिया है।

पर्यावरण पर चौतरफा हो रहे प्रहार ने उन्हें 14 वर्ष पहले झकझोर कर रख दिया। उन्होंने पेड़ों की कटान रोकने की मुहिम छेड़ने के बजाय पौधरोपण को ही अपने जीवन का उद्?देश्य बना लिया। वनों व वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए उन्होंने कतर्नियाघाट फ्रेंड्स क्लब का गठन किया। बहराइच शहर के अकबरपुरा मुहल्ले के रहने वाले भगवानदास लखमानी बताते हैं कि बचपन से ही उन्हें जंगल में घूमने और विचरण करते हुए वन्यजीवों के साथ हरे-भरे पेड़ों को देखने का शौक था। वर्ष 2005 में उनकी मुलाकात कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग में डीएफओ रहे रमेश कुमार पांडेय से हुई। उन्हीं की प्रेरणा से क्लब का गठन कर 14 वर्षों से वन्यजीवों व पर्यावरण संरक्षण में लगे हैं। अब तक वे 5000 पौधों का रोपण अपने टीम के सदस्यों के साथ कर चुके हैं। गर्मियों में जंगल को आग से बचाने के लिए जंगल से सटे गांवों में जहां जागरूकता अभियान चलाते हैं वहीं दुर्घटनाओं में वन्यजीवों की मौत न हो इसके लिए भी वे ट्रेन व वाहन चालकों को जागरूक करते हैं। जंगल के आसपास रहने वाले लोगों को ¨हसक वन्यजीवों के हमले के बचाव के लिए भी जागरूकता अभियान चलाते हैं। प्रतिवर्ष 29 जुलाई को ग्लोबल डे के अवसर पर कतर्निया संरक्षित वन क्षेत्र में अच्छे काम करने वाले वन कर्मियों को सम्मानित भी करते हैं। अब तक 150 दैनिक वेतनभोगी कर्मियों का उत्साहवर्धन कर चुके हैं। स्कूलों में जाकर बच्चों को टॉक शो के माध्यम से वन्यजीवों के चित्र दिखाकर उन्हें पर्यावरण व वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूक करते हैं। चित्रकला व क्विज प्रतियोगिता के माध्यम से भी जल संरक्षण व पॉलीथिन का उपयोग न करने का संकल्प भी दिलाते हैं। गौरैया संरक्षण भी इनका शगल बन गया है। 1500 घोसले को वितरित कर चुके है। वे कहते हैं कि वन्यजीवों व पेड़-पौधों से उनका बेहद लगाव है। हर रोज उनकी कोशिश रहती है कि कहीं कोई पौध लगाए जा सके ।